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रायपुर — महिला आयोग की जनसुनवाई में कड़ा रुख, आयुक्त–उपायुक्त और एमिटी यूनिवर्सिटी प्रबंधन को पुलिस के माध्यम से तलब करने के आदेश

रायपुर (CG ई खबर) : छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने शुक्रवार को आयोग कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की। प्रदेश स्तर पर 351वीं तथा रायपुर जिले में 170वीं जनसुनवाई आयोजित की गई। सुनवाई के दौरान कई गंभीर मामलों पर आयोग ने सख्त निर्देश जारी किए।


🔹 बीएसयूपी मकान मामले में आयुक्त–उपायुक्त को नोटिस

सुनवाई के दौरान एक मामले में आवेदिका ने नगर निगम रायपुर के आयुक्त और उपायुक्त पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उसकी मां से बीएसयूपी मकान दिलाने के नाम पर 3,000 रुपये लिए गए, लेकिन 9 साल बाद भी मकान नहीं दिया गया
आवेदिका की मां की मृत्यु हो चुकी है और 2013 में नगर निगम द्वारा मकान भी तोड़ दिया गया था। आवेदिका को आशंका है कि मकान अधिकारियों की मिलीभगत से किसी अन्य को दे दिया गया है
आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए आयुक्त और उपायुक्त को एसपी रायपुर के माध्यम से उपस्थिति नोटिस जारी करने का निर्देश दिया


🔹 आत्महत्या के मामले में एमिटी यूनिवर्सिटी प्रबंधन को पुलिस के माध्यम से बुलाने के आदेश

दूसरे प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन की प्रताड़ना से उसकी बेटी ने आत्महत्या कर ली, और घटना को दबाने की कोशिश की जा रही है
आज की सुनवाई में भी अनावेदक पक्ष अनुपस्थित रहा, जिसके बाद महिला आयोग ने एमिटी यूनिवर्सिटी के सभी पदाधिकारियों को थाना के माध्यम से उपस्थित कराने के आदेश दिए


🔹 अनुकम्पा नियुक्ति के लिए 9 वर्षों से भटक रही महिला

एक अन्य मामले में आवेदिका ने बताया कि अनुकम्पा नियुक्ति के लिए 2016 से आवेदन लंबित है, लेकिन अधिकारियों द्वारा लगातार गुमराह किया जा रहा है
सुनवाई के दौरान भी संबंधित अधिकारी उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद आयोग ने एसपी रायपुर के माध्यम से तलब करने को कहा ताकि प्रकरण का निपटारा किया जा सके।


🔹 काउंसलिंग के बाद दंपति साथ रहने पर राज़ी

एक प्रकरण में दोनों पक्षों की विस्तृत काउंसलिंग की गई। दोनों ने साथ रहने की सहमति जताई, जिसके बाद
आयोग ने निर्देश दिया कि इकरारनामा तैयार होने के बाद मामला नस्त किया जाएगा।
आयोग एक वर्ष तक मामले की निगरानी करेगा


🔹 पति का पता न मिल पाने पर 1 माह का समय

एक अन्य मामले में पति के लापता होने और आवेदिका द्वारा पता उपलब्ध न करा पाने पर आयोग ने 1 माह की मोहलत देते हुए पति का पता प्रस्तुत करने को कहा
और इस प्रकरण में सास–ससुर को मामले से मुक्त कर दिया गया


🔹 शिक्षा विभाग से जुड़े मामले का निपटारा

अंतिम मामले में दोनों पक्ष पूर्व में शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य रहे और शिक्षा विभाग में शिकायतें चल रही थीं।
क्योंकि यह मामला कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न कानून के दायरे में नहीं आता, आयोग ने सलाह दी कि दोनों पक्ष विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर विवाद का समाधान कराएं
इसके बाद मामला आयोग से नस्त कर दिया गया


✔️ सुनवाई के दौरान महिला आयोग का संदेश

महिला उत्पीड़न से जुड़े हर मामले में न्याय, पारदर्शिता और त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए आयोग प्रतिबद्ध है।
अदालतों, प्रशासनिक अधिकारियों या संस्थानों द्वारा अनुपस्थित रहने या टालमटोल करने पर अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



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