देखरेख के अभाव में बदहाल गांधी उद्यान, दीपका में सार्वजनिक सुविधा बन गई चिंता का विषय

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(CG ई खबर | कटघोरा ब्लॉक संवाददाता: पिंकी महंत)

कोरबा। कोरबा जिले के दीपका क्षेत्र में स्थित गांधी उद्यान की वर्तमान स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। एसईसीएल गेवरा प्रबंधन द्वारा निर्मित यह उद्यान कभी क्षेत्रवासियों के लिए सुकून और मनोरंजन का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज देखरेख के अभाव में यह जगह उपेक्षा और अव्यवस्था की मिसाल बन गई है।

प्रियदर्शनी कॉम्प्लेक्स के पास स्थित उद्यान की बदहाली

दीपका का गांधी उद्यान प्रियदर्शनी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के समीप स्थित है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। इसके बावजूद उद्यान की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से किसी भी प्रकार का रखरखाव नहीं किया गया है।

मुख्य समस्याएं

उद्यान में कई गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं—

  • टूटी हुई सुविधाएं: बच्चों के झूले जर्जर हो चुके हैं, वहीं बैठने के लिए लगाई गई बेंच भी टूटकर अनुपयोगी हो गई हैं।
  • गंदगी का अंबार: उद्यान परिसर में जगह-जगह कचरा फैला हुआ है। आसपास के कुछ दुकानदारों द्वारा भी यहां कचरा फेंके जाने की शिकायतें मिल रही हैं।
  • सुरक्षा का अभाव: उद्यान में कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है, जिससे आवारा मवेशी और कुत्तों का जमावड़ा बना रहता है।
  • शौचालय की कमी: सार्वजनिक शौचालय न होने से खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।

सिर्फ दीपका ही नहीं, अन्य शहरों में भी यही हाल

गौरतलब है कि गांधी उद्यान नाम से संचालित कई सार्वजनिक पार्क देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह उपेक्षा का शिकार हैं—

  • बरेली (उत्तर प्रदेश): गांधी उद्यान की ‘बापू बाल वाटिका’ में झूले वर्षों से टूटे पड़े हैं, जिससे बच्चों के घायल होने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
  • बाराबंकी (उत्तर प्रदेश): कई पार्कों में टूटी बेंच, खराब झूले और बढ़ी हुई झाड़ियां लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।

संभावित समाधान

स्थानीय लोगों और रिपोर्ट के अनुसार, यदि प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन ध्यान दे तो स्थिति में सुधार संभव है—

  • उद्यान में मवेशी-रोधी द्वार लगाया जाए।
  • स्थायी देखरेख कर्मी की नियुक्ति की जाए।
  • नियमित पानी व्यवस्था और हरियाली बहाल की जाए।
  • आसपास के व्यावसायिक क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया जाए।

जनता की उम्मीद

स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन इस दिशा में शीघ्र कदम उठाएंगे, ताकि गांधी उद्यान फिर से बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ सार्वजनिक स्थल बन सके।

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