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एनटीपीसी कोरबा में ठेका मजदूरों से अवैध वसूली का आरोप, श्रम कानूनों के उल्लंघन को लेकर कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन


(CG ई खबर | दर्री ब्लॉक रिपोर्टर : सरस्वती मरकाम)

छत्तीसगढ़/कोरबा के.एस.टी.पी.एस/एन.टी.पी.सी कोरबा में कार्यरत ठेका श्रमिकों के वेतन से ठेकेदारों द्वारा अवैध वसूली और श्रम कानूनों के खुले उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों को लेकर 28 जनवरी 2026 को के.सी. जैन मार्ग चौक, एनटीपीसी से कलेक्टर कार्यालय कोरबा तक पैदल रैली निकाली गई। रैली के बाद श्रमिक संगठन द्वारा जिला कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में बताया गया कि भारत सरकार की महारत्न कंपनी एनटीपीसी कोरबा में प्रचालन, अनुरक्षण, सिविल एवं हाउस कीपिंग जैसे कार्य बड़ी संख्या में ठेकेदारों के माध्यम से कराए जाते हैं। केंद्रीय न्यूनतम वेतन लागू होने के बावजूद श्रमिकों के साथ व्यापक स्तर पर अनियमितताएं की जा रही हैं। ठेका श्रमिकों को ऑनलाइन माध्यम से वेतन भुगतान के बाद ठेकेदारों के मुंशी/सुपरवाइजर द्वारा प्रतिदिन 250 से 350 रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने का आरोप लगाया गया है। वसूली से इनकार करने पर श्रमिकों की ड्यूटी बंद कर दी जाती है या गेटपास रोक दिया जाता है।


श्रमिक संगठन का आरोप है कि पीड़ित मजदूर जब इस संबंध में एनटीपीसी प्रबंधन (मुख्य नियोक्ता) से शिकायत करते हैं, तो उनकी सुनवाई नहीं होती। कई श्रमिकों को नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची, हाजिरी कार्ड, पीएफ और ईएसआईसी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं, जिससे वे अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।

संघ द्वारा की गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

  • सीएचपी के उन आईटीआई कुशल ठेका मजदूरों को तत्काल काम पर वापस रखा जाए, जिन्हें वेतन से अवैध कटौती न मानने पर बैठा दिया गया है।
  • सभी ठेका श्रमिकों को नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची, हाजिरी कार्ड, पीएफ एवं ईएसआईसी कार्ड अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए।
  • नियमित कार्यों में ठेकेदार बदलने पर पुराने अनुभवी ठेका श्रमिकों को न बदला जाए।
  • अवैध वसूली करने वाले मुंशी/सुपरवाइजरों के गेटपास तत्काल निरस्त किए जाएं।
  • वीडियो, फोन-पे ट्रांजेक्शन सहित प्रस्तुत सबूतों के आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कर उन्हें प्लांट से बाहर किया जाए।
  • ठेका प्रक्रिया में अनुमानित लागत से 30–37 प्रतिशत कम दर (L1) पर ठेका देने की प्रथा पर रोक लगाई जाए।
  • हाउस कीपिंग और सिविल ठेकों में हो रहे श्रम कानून उल्लंघन को तत्काल सुधारा जाए।
  • श्रमिकों का गेटपास ठेके की पूरी अवधि के लिए बनाया जाए।
  • वेतन से अवैध वसूली से उत्पन्न काले धन पर रोक लगाते हुए इसे राष्ट्रविरोधी कृत्य मानकर कार्रवाई की जाए।

श्रमिक संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मामले ने अब जिले में श्रमिक अधिकारों और एनटीपीसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई में श्रम कानूनों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



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