कृष्णा नगर वार्ड 7 में पानी के लिए हाहाकार, आंदोलन की चेतावनी
(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)
दीपका//कोरबा :-
नगर पालिका परिषद दीपका अंतर्गत कृष्णा नगर वार्ड क्रमांक 7 के निवासी इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (नल-जल योजना) यहां पूरी तरह दम तोड़ती नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि वार्डवासी पिछले कई दिनों से बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कोयला ढुलाई के लिए बनाए जा रहे रेल कॉरिडोर के निर्माण कार्य के दौरान वार्ड की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। पाइपलाइन टूटने के बाद पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप्प हो गई, जिससे वार्ड में हाहाकार मच गया।
रेल कॉरिडोर कार्य में टूटी पाइपलाइन
वार्डवासियों ने बताया कि रेलवे प्रबंधन द्वारा पाइपलाइन को जोड़ने और मरम्मत का दावा तो किया गया, लेकिन तकनीकी खामी या लापरवाही के कारण आज तक घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। मरम्मत के बाद भी सप्लाई शून्य बनी हुई है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है।
प्रशासन की चुप्पी, जनता बेहाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उन्होंने कई बार वार्ड पार्षद, नगर पालिका अधिकारियों और कर्मचारियों को मौखिक रूप से समस्या से अवगत कराया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। जल संकट के चलते लोगों को खाना बनाने, नहाने-धोने और पीने के पानी तक के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
गर्मी से पहले बिगड़े हालात
वार्डवासियों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि हर वर्ष गर्मी के मौसम में पानी की समस्या रहती है, लेकिन इस बार गर्मी शुरू होने से पहले ही पाइपलाइन बंद हो जाने से स्थिति और भयावह हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदार अपनी भूमिका निभाते, तो यह संकट टाला जा सकता था।
आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी
कृष्णा नगर वार्ड क्रमांक 7 के निवासियों ने नगर पालिका प्रशासन और रेलवे प्रबंधन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पानी की नियमित सप्लाई बहाल नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे। इसकी समस्त जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन और संबंधित ठेकेदार की होगी।
प्रमुख बिंदु :
- रेल कॉरिडोर निर्माण के बाद से वार्ड 7 में पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप्प।
- पाइपलाइन मरम्मत के बावजूद घरों तक नहीं पहुंच रहा पानी।
- पार्षद और नगर पालिका अधिकारियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप।
- जल संकट के समाधान की तत्काल मांग, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी।












