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रेल सेवा बढ़ाने की मांगों का दौर: कोरबा से लेकर दार्जिलिंग तक, सांसदों से लेकर मंत्री तक


(CG ई खबर | कटघोरा ब्लॉक संवाददाता: पिंकी महंत)

देशभर में बेहतर रेल कनेक्टिविटी को लेकर मांगों का सिलसिला तेज हो गया है। अलग-अलग राज्यों से स्थानीय प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और सांसद लगातार रेल मंत्रालय के समक्ष नई रेल लाइनों, ट्रेनों के विस्तार और ठहराव को लेकर पत्राचार व बैठकें कर रहे हैं। कहीं वर्षों से लंबित परियोजनाओं को शुरू करने की मांग है, तो कहीं मौजूदा ट्रेनों के मार्ग विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।


कोरबा में उठीं ठोस और तात्कालिक मांगें

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में रेल संघर्ष समिति और जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत से मुलाकात कर रेल सुविधाओं के विस्तार को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

  • पिटलाइन संचालन: कोरबा में पिटलाइन को तत्काल शुरू किया जाए, जिससे ट्रेनों के रखरखाव में सुविधा मिले।
  • मौजूदा ट्रेनों का विस्तार:
    • जबलपुर–रायपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस (11701/11702) को कोरबा तक बढ़ाया जाए।
    • तिरुपति–बिलासपुर एक्सप्रेस (17841/17842) को कोरबा तक विस्तारित किया जाए, क्योंकि यह ट्रेन वर्तमान में लगभग 22 घंटे बिलासपुर में खड़ी रहती है।
    • रायपुर–कोरबा हसदेव एक्सप्रेस (18249/18250) को दुर्ग तक चलाया जाए।
  • नया परिचालन: भोपाल–बिलासपुर पैसेंजर (18235) के रखरखाव के बाद उसे बिलासपुर–कोरबा मार्ग पर चलाया जाए तथा वापसी में इसे सीधी कोरबा–भोपाल पैसेंजर के रूप में संचालित किया जाए।

प्रतिनिधियों का कहना है कि इन मांगों से औद्योगिक जिले कोरबा के साथ-साथ आम यात्रियों, छात्रों और व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।


देश के अन्य हिस्सों से भी उठ रहीं समान आवाजें

कोरबा अकेला जिला नहीं है जहाँ रेल सुविधाओं की मांग उठ रही है। देश के विभिन्न राज्यों से भी इसी तरह की पहल सामने आई है—

  • दार्जिलिंग/बिहार (किशनगंज): सांसद राजू बिष्ट ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के मार्ग में बदलाव की मांग की है। प्रस्ताव है कि इन ट्रेनों को बागडोगरा–नक्सलबाड़ी–ठाकुरगंज रेलखंड से चलाया जाए, जिससे स्थानीय छात्रों, मरीजों और पेशेवरों को सीधा लाभ मिल सके।

  • उत्तराखंड: गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर रामनगर से देहरादून के लिए सीधी रेल सेवा शुरू करने की मांग रखी। साथ ही, उत्तराखंड संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का पौरुमदारा स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव देने का भी अनुरोध किया गया।

  • उत्तर प्रदेश (हरदोई): सांडी कस्बे में बीते 20 वर्षों से रेल सेवा बहाली की मांग चल रही है। 63.70 किमी नई रेल लाइन का सर्वे हो चुका है, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। सांसद जयप्रकाश रावत ने इस परियोजना को स्वीकृति देने की मांग की है।


रेलवे की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजनाएं

इन मांगों के बीच रेलवे भी आधुनिकीकरण और विस्तार की दिशा में बड़े कदम उठा रहा है—

  • 52 सप्ताह, 52 सुधार: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 में 52 हफ्तों में 52 बड़े सुधार लागू करने की घोषणा की है। इनमें सुरक्षा, एआई तकनीक का उपयोग, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और खानपान सेवाओं में सुधार शामिल हैं।
  • नई सेवाएं: 17 जनवरी 2026 को पहली स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन प्रस्तावित है। इसके साथ ही 17–18 जनवरी से उत्तर-पूर्व सीमांत रेलवे क्षेत्र में छह नई साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू होंगी।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: गोरखपुर सहित कई शहरों में स्टेशन पुनर्विकास और लाइन दोहरीकरण के कार्यों से अगले पांच वर्षों में ट्रेन संचालन क्षमता दोगुनी करने की योजना है।

मांगों और योजनाओं के बीच संतुलन की चुनौती

स्पष्ट है कि एक ओर स्थानीय स्तर पर रेल सुविधाओं की तीव्र मांग है, तो दूसरी ओर रेलवे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सुधार और विस्तार की योजना पर काम कर रहा है। सांसद इन जन-आकांक्षाओं को केंद्र तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं। हालांकि, नई लाइनों या मार्ग परिवर्तनों पर अंतिम निर्णय तकनीकी व्यवहार्यता, वित्तीय संसाधनों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।

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