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Chhattisgarh Liquor Scam : पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत


(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)

छत्तीसगढ़ / रायपुर के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री एवं कोंटा विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब एक साल से अधिक समय बाद लखमा जेल से बाहर आएंगे। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की।

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कई कड़ी शर्तें लगाई हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा। वे केवल न्यायालय में पेशी के दौरान ही छत्तीसगढ़ आ सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपना पता व मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा

ढाई घंटे चली सुनवाई

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ शराब घोटाले को लेकर करीब ढाई घंटे तक सुनवाई चली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कवासी लखमा को सशर्त जमानत देने का आदेश दिया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि कवासी लखमा शराब सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे और उनके निर्देश पर ही यह सिंडिकेट काम करता था। ED के अनुसार, शराब नीति में बदलाव और सिंडिकेट को संरक्षण देने में लखमा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

15 जनवरी को हुई थी गिरफ्तारी

शराब घोटाला मामले में ED ने 15 जनवरी को पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद ईओडब्ल्यू (EOW) ने भी इस मामले में केस दर्ज किया। गिरफ्तारी के बाद से ही कवासी लखमा जेल में बंद थे। हाल ही में ED ने उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है।

हर महीने 2 करोड़ कमीशन लेने का आरोप

यह घोटाला उस समय सामने आया, जब राज्य में भूपेश बघेल सरकार थी और कवासी लखमा आबकारी मंत्री के पद पर थे। आरोप है कि शराब माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में ढील दी गई और बदले में लखमा को हर महीने करीब 2 करोड़ रुपये कमीशन मिलता था।

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है। ED ने इस संबंध में एसीबी में FIR दर्ज कराई है। जांच एजेंसी के मुताबिक यह घोटाला 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का है।
FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल होने की बात कही गई है। ED का दावा है कि तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

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