कोरबा : खदान से कोयला लेकर निकलने वाली गाड़ियों का प्लांट, कोल साइडिंग या कोल वाशरी तक जाने का रास्ता तय होता है, की किस रस्ते से गाडियों को लेकर जाना है। वहीं ट्रांसपोर्ट कंपनियों की गाड़ियों के माध्यम से कोयले को ले जाया जाता है, मगर इन ट्रांसपोर्ट गाडियों द्वारा रास्ते में ही कोयले में मिलावट कर हेराफेरी व चोरी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। एस.ई.सी.एल. इन्हें पकड़ने के लिए कई तरीके अपनाने के बाद भी कोई सफलता नहीं मिल रही थी। लेकिन अब कोयला चोरी और मिलावट रोकने के लिए बी.टी.एस. (बेस ट्रांसीवर स्टेशन) सिस्टम को कारगर माना जा रहा है।
कोरबा : कोल इंडिया की साउथ ईस्टर्न कोल-फील्ड्स लिमिटेड (एस.ई.सी.एल) कंपनी अब इस सिस्टम पर काम करना शुरू कर दिये है। ट्रांसपोर्ट गाडियों की कंपनी के 13 एरिया में अब तक 1200 से अधिक कोल ट्रांसपोर्टिंग में लगे वाहनों को ट्रेकिंग सिस्टम से लैस किया जा चुका है। ट्रांसपोर्ट वाहनों में कंपनी से पहले से लग कर आने वाली जी.पी.एस के साथ एस.ई.सीे.एल अब अपनी अलग से बी.टी.एस लगा रही। इससे वास्तविक समय पर वाहनों पर पूर्ण रूप से निगरानी की जा रही है। अगर कोई भी वाहन के रास्ता बदलते ही पता चल जाएगा की कौन सा वहां कहा जा रहा है। अब किसी भी वाहन को ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किए बिना खदान में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। अभी हाल ही में दीपका कोयला खदान से कोयला लेकर रवाना हुए चार ट्रेलर से अच्छा कोयला रास्ते में अवैध डिपो में उतार लिए गया और उसकी जगह चूरा व पत्थर मिला दिया गया। जिस कंपनी में यह कोयला भेजा गया था वंहा कोयले का जब परिक्षण किया गया तब एस बात का पता चला और थाने में शिकायत की गई। कोयले की अफरातफरी का अपराध पंजीबद्ध कर चालक की गिरफ्तारी की गई। इसी तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। इससे निपटने के लिए अब पहले ही खदानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं, फिर वह चाहे चेकपोस्ट हो या मेनगेट। सभी तरफ निगरानी की जा रही है।











