बिलासपुर (CG ई खबर): हाईकोर्ट ने एक दंपत्ति की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने तलाक़ के बाद रिश्ते सुधरने के दावे पर दोबारा साथ रहने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने साफ कहा कि जब तलाक़ आपसी सहमति से हो चुका है, तो उसे निरस्त करने की गुंजाइश नहीं बचती।
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि “कानून भावनाओं पर नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रक्रिया पर चलता है।”
4 जनवरी 2025 को सहमति से तलाक़
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर सिविल लाइन क्षेत्र की महिला और मोपका निवासी युवक की शादी के बाद आपसी मतभेद बढ़ गए। दोनों ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत फैमिली कोर्ट में मामला दर्ज किया। फैमिली कोर्ट ने 4 जनवरी 2025 को पारस्परिक सहमति से तलाक़ मंजूर कर डिक्री पारित की थी।
तलाक़ के बाद मथुरा की यात्रा
तलाक़ के बाद भी दंपत्ति में फिर से बातचीत शुरू हुई और 11 से 15 मार्च 2025 तक दोनों मथुरा यात्रा पर भी गए। इसके सबूत के तौर पर ट्रेन टिकट, होटल बुकिंग और तस्वीरें कोर्ट में पेश की गईं। इसके आधार पर उन्होंने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करने की मांग की।
हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्णय
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि दंपत्ति ने 9 दिसंबर 2024 को ही आवेदन देकर छह महीने की कूलिंग पीरियड हटाने की मांग की थी और अगस्त 2022 से दोनों अलग रह रहे थे। इसलिए, फैमिली कोर्ट का तलाक़ का निर्णय विधि सम्मत है और उसके खिलाफ अपील मान्य नहीं है।
👉 कोर्ट ने साफ कर दिया कि आपसी सहमति से हुए तलाक़ को बाद में रिश्ते सुधरने के आधार पर निरस्त नहीं किया जा सकता।









