(CG ई खबर : विजय चौहान- संभाग ब्यूरो चीफ़)
रायपुर/कोरबा — हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने कहा कि ग्राम घठबार्रा के निवासियों की ओर से सामुदायिक वन अधिकार (CFR) का कोई ठोस दावा प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार के वर्ष 2012 और 2022 में जारी आदेशों को सही ठहराया, जिनके तहत पारसा ईस्ट एवं केते बासन कोल ब्लॉक में खनन की मंजूरी दी गई थी।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजकुमार गुप्ता ने तर्क दिया कि हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति कोई वैधानिक संस्था नहीं है, इसलिए यह ग्रामसभा या ग्रामीणों की ओर से सामुदायिक अधिकार का दावा नहीं कर सकती।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि खनन परियोजना के लिए आवश्यक पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। इस निर्णय के साथ अदालत ने खनन परियोजना को वैध घोषित करते हुए याचिका को निरस्त कर दिया।
📍 यह फैसला हसदेव अरण्य क्षेत्र में जारी खनन और संरक्षण के बीच वर्षों से चल रहे संघर्ष को नई दिशा दे सकता है।









