कोरबा (CG ई खबर): छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS) — अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) से संबद्ध — की जिला समिति कोरबा ने बुधवार को गेवरा क्षेत्र में जबरन खदान विस्तार, पुनर्वास और रोजगार की मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन किया। किसान सभा के नेतृत्व में गेवरा क्षेत्र के प्रभावित गांवों के भू-विस्थापितों ने एसईसीएल के गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय के दोनों मुख्य द्वारों को करीब छह घंटे तक घेराव कर बंद रखा। इस दौरान एसईसीएल का कार्य पूरी तरह ठप हो गया।
घेराव के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और सीआईएसएफ बल मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश में सीआईएसएफ और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। किसान सभा के नेताओं ने साफ कहा कि जब तक भू-विस्थापितों की रोजगार, बसावट और मुआवजा संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक खदान विस्तार नहीं होने दिया जाएगा।
प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल को प्रत्येक छोटे खातेदार और विस्थापित परिवार को नियमित रोजगार देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी और प्रशासन मिलकर जबरन खदान विस्तार का प्रयास कर रहे हैं, जबकि पुराने विस्थापितों के रोजगार और मुआवजा के मामले अब तक लंबित हैं। किसान सभा ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो खदान बंद कर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि एसईसीएल से प्रभावित प्रत्येक छोटे-बड़े खातेदारों को स्थायी नौकरी दी जाए, विस्थापितों को बसावट स्थल मिले और प्रभावित गांवों में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं तत्काल बहाल की जाएं। उन्होंने कहा कि यदि प्रबंधन ने अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन को पूरे क्षेत्र में फैलाया जाएगा।
किसान सभा ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि लंबित रोजगार प्रकरणों का त्वरित समाधान किया जाए, छोटे खातेदारों को रोजगार दिया जाए और पुनर्वास कार्य में पारदर्शिता लाई जाए।
घेराव में जनपद सदस्य नेहा सिंह तंवर, सरपंच विष्णु बिंझवार, शिवकुमारी, दीपक साहू, दामोदर श्याम, रेशम यादव, तुकेश दास, रमेश दास, अमित भारद्वाज, किशुन लाल, बंधन, मनोज कुमार, विवेकदास, संजय साहू, देव लाल चंद्रा, नारायण, प्रकाश, पवन, राजेंद्र राठौर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और विस्थापित परिवार शामिल थे।
किसान सभा ने चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन और प्रशासन ने रोजगार, पुनर्वास और मुआवजा की समस्याओं पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र में खदान बंद कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।









