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खरमोरा में खुलेआम गांजा कारोबार! मेडिकल कॉलेज के पास नशे का अड्डा, प्रशासन मौन

गांजा

कोरबा से स्पेशल रिपोर्ट (CG ई खबर|छत्तीसगढ़
 स्टेट ब्यूरो चीफ: प्रदीप राव ) : कोरबा जिले में नशे का कारोबार अब खुलेआम फल-फूल रहा है। जिले के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक, खरमोरा, जहाँ से नया मेडिकल कॉलेज महज़ 150 मीटर की दूरी पर है, वहीं पर खुले आम "पॉले" नामक आदतन नशीली पदार्थ विक्रेता द्वारा गांजे की अवैध बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब प्रशासन और पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है — लेकिन कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की गई।

मेडिकल कॉलेज के पास नशे का अड्डा
स्थानीय लोगों के अनुसार, खरमोरा में स्थित इस अवैध ठिकाने पर रोज़ाना कई युवक और बाहरी लोग आते-जाते देखे जाते हैं। यह जगह मेडिकल कॉलेज से महज़ 150 मीटर दूर है, जहाँ सैकड़ों विद्यार्थी, मरीज और स्टाफ रोज़ गुजरते हैं। बावजूद इसके, नशे के इस खुले कारोबार पर किसी भी विभाग की नज़र नहीं पड़ रही।

पहले भी दर्ज हैं प्रकरण
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पॉले पर पहले भी नशीली पदार्थों की बिक्री के कई मामले दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद आरोपी लगातार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। आसपास के लोगों का कहना है कि पॉले के खिलाफ कार्रवाई न होने के पीछे “कुछ प्रभावशाली लोगों की मौन सहमति” भी हो सकती है।

“हम कई बार पुलिस को शिकायत दे चुके हैं। मेडिकल कॉलेज के आसपास के माहौल पर इसका बुरा असर पड़ रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती,” — एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

नशे की चपेट में युवा
खरमोरा इलाके के युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ती दिख रही है। सोशल मीडिया पर भी कई बार इस इलाके से जुड़े वीडियो और पोस्ट वायरल हो चुके हैं, जिनमें खुलेआम गांजा और अन्य नशीले पदार्थ बिकते दिखाई देते हैं।

प्रशासन पर सवाल
स्थानीय लोगों का सवाल है — आखिर जब मेडिकल कॉलेज जैसे संवेदनशील संस्थान के पास अवैध नशे की बिक्री हो रही है, तो संबंधित विभाग चुप क्यों है? क्या प्रशासन इस पूरे मामले को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रहा है?

जिला पुलिस और नशा नियंत्रण शाखा को इस मामले में सख्त कदम उठाने की ज़रूरत है, ताकि मेडिकल कॉलेज क्षेत्र को नशे के जाल से मुक्त कराया जा सके।

कोरबा जिले में नशे का यह फैलता कारोबार समाज के लिए गहरी चिंता का विषय बन चुका है। सवाल सिर्फ पॉले नामक विक्रेता का नहीं, बल्कि उस सिस्टम का भी है जो इन अवैध धंधों को पनपने दे रहा है।

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