(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ़ : विजय चौहान)
कोरबा। जिले के तिलईडाड़ गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब एक सूखे सेप्टिक टैंक के भीतर ग्रामीणों ने लगभग 12 फुट लंबे दुर्लभ किंग कोबरा को देखा। सूचना मिलते ही कोरबा वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी की संयुक्त रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद इस विशाल विषधर का सुरक्षित बचाव किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सेप्टिक टैंक के पास हलचल देख ग्रामीणों को सांप होने की आशंका हुई, जिसके बाद तत्काल वन विभाग को सूचित किया गया। रेस्क्यू टीम ने पूरी सावधानी और धैर्य के साथ विशेष उपकरणों की मदद से किंग कोबरा को बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिनमें उत्सुकता के साथ-साथ भय का माहौल भी देखा गया।
वन विभाग की निगरानी में रेस्क्यू के बाद किंग कोबरा को सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इस सफल अभियान से न केवल एक दुर्लभ प्रजाति की जान बची, बल्कि ग्रामीणों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी।
इस संबंध में जिला वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) प्रेमलता यादव ने बताया कि किंग कोबरा, जिसे स्थानीय रूप से “पहाड़ चित्ती” भी कहा जाता है, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 के अंतर्गत पूर्ण रूप से संरक्षित प्रजाति है। यह विश्व का सबसे लंबा विषैला सांप है और पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
डीएफओ ने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी सांप या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो उन्हें मारने या परेशान करने का प्रयास न करें। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग के टोल फ्री नंबर 8817534455 पर सूचना दें, ताकि समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।
यह घटना न केवल साहसिक रेस्क्यू का उदाहरण है, बल्कि मानव और वन्यजीवों के सह-अस्तित्व की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

