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जनगणना 2027 की तैयारी: कोरबा जिले में मलिन बस्तियों की पहचान व गणना प्रक्रिया शुरू


(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)

रायपुर/कोरबा। कार्यालय कलेक्टर एवं प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी, कोरबा द्वारा भारत सरकार, गृह मंत्रालय के अधीन जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप जिले में जनगणना 2027 की तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। इसके तहत कोरबा जिले के सभी चार्ज अधिकारियों—आयुक्त नगर पालिक निगम, मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद कटघोरा, दीपका, बांकीमोंगरा तथा नगर पंचायत छुरीकला और पाली—को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रथम चरण में स्लम (मलिन बस्ती) की पहचान
जनगणना 2027 के प्रथम चरण में शहरी क्षेत्रों में स्थित मलिन बस्तियों (स्लम) की जनसांख्यिकी के लिए उन्हें चिन्हित कर जनगणना ब्लॉक गठित किया जाना है। इसके लिए जिले के प्रत्येक नगरीय निकाय को अपने-अपने क्षेत्र की मलिन बस्तियों की विस्तृत जानकारी निर्धारित प्रारूप में भरकर जनगणना निदेशालय को प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिसूचित मलिन बस्तियों के लिए संबंधित अधिसूचना की प्रति तथा मान्यता प्राप्त मलिन बस्तियों के लिए सामान्य सभा अथवा संबंधित नगरीय निकाय द्वारा जारी आदेश/पत्र की प्रति अनिवार्य रूप से संलग्न करना होगा। यदि किसी नगरीय निकाय क्षेत्र में मलिन बस्ती नहीं है, तो “निरंक” (शून्य) जानकारी भेजना अनिवार्य किया गया है।

2011 के आंकड़े: छत्तीसगढ़ में 2582 मलिन बस्तियां
भारत में 21वीं सदी की शुरुआत से औद्योगिक विकास, आर्थिक अवसरों और निरंतर प्रवासन के कारण शहरीकरण में तेज़ी से वृद्धि हुई है। बेहतर आजीविका की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर बढ़ते प्रवासन तथा अपर्याप्त शहरी नियोजन के चलते भूमि और बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव पड़ा है। इसके परिणामस्वरूप मलिन बस्तियों का विस्तार हुआ है, जहां पेयजल, स्वच्छता, जलनिकासी और अपशिष्ट निपटान जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहता है।

जनगणना 2011 के दौरान देशभर में कुल 1.23 लाख मलिन बस्ती गणना ब्लॉक दर्ज किए गए थे। वहीं छत्तीसगढ़ राज्य में 2582 मलिन बस्तियां पाई गई थीं, जिनकी कुल जनसंख्या लगभग 18.98 लाख थी। देश स्तर पर यह आंकड़ा 6.55 करोड़ रहा। मलिन बस्तियों के सुधार एवं पुनर्वास के लिए प्रभावी और समन्वित नीति निर्माण हेतु सटीक और व्यापक जानकारी का होना अत्यंत आवश्यक है।

तीन श्रेणियों में वर्गीकृत होंगी मलिन बस्तियां
जनगणना 2011 की भांति ही जनगणना 2027 में भी मलिन बस्तियों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा—

  1. अधिसूचित मलिन बस्ती (कोड-1):
    राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन अथवा स्थानीय निकाय द्वारा किसी अधिनियम (मलिन बस्ती अधिनियम सहित) के अंतर्गत अधिसूचित सभी क्षेत्र।

  2. मान्यता प्राप्त मलिन बस्ती (कोड-2):
    वे क्षेत्र जिन्हें राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, स्थानीय सरकार या हाउसिंग एवं स्लम बोर्ड द्वारा मलिन बस्ती के रूप में मान्यता दी गई हो, परंतु औपचारिक रूप से अधिसूचित न किया गया हो।

  3. चिन्हित मलिन बस्ती (कोड-3):
    ऐसे क्षेत्र जहां कम से कम 300 की आबादी अथवा लगभग 60–70 परिवार निवासरत हों, मकान कमजोर, सघन एवं संकरे हों तथा मूलभूत सुविधाओं का अभाव हो। इन क्षेत्रों की पहचान चार्ज अधिकारी द्वारा की जाएगी तथा जनगणना कार्य निदेशालय के अधिकारी द्वारा निरीक्षण भी किया जाएगा। चार्ज रजिस्टर में इनकी समुचित प्रविष्टि अनिवार्य होगी।

प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जनगणना 2027 की प्रक्रिया सुचारु एवं सटीक रूप से संपन्न की जा सके।

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