(CG ई खबर | जिला संवाददाता : नारायण चंद्राकर)
अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के राजनीतिक केंद्र अंबिकापुर में एक बार फिर कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हालिया अंबिकापुर दौरे के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी इतनी तेज हो गई कि मामला अब व्हाट्सएप ग्रुप से निकलकर सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है। वायरल हो रही चैट्स ने कांग्रेस की आंतरिक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, सरगुजा महाराज टीएस सिंह देव से जुड़े कांग्रेस के एक व्हाट्सएप ग्रुप की चैट इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इन चैट्स में साफ तौर पर लिखा गया है कि यह ग्रुप “सरगुजा महाराज टीएस बाबा का है, भूपेश बघेल का नहीं।” इतना ही नहीं, ग्रुप में यह भी संदेश डाला गया कि “बघेल विचारधारा वाले सम्मानित सदस्यों से निवेदन है कि वे स्वयं ग्रुप छोड़ दें, अन्यथा किसी को हटाना पड़ा तो यह बहुत खराब लगेगा।”
भूपेश के दौरे से भड़की नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अंबिकापुर पहुंचे थे, जहां स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। लेकिन इस कार्यक्रम में टीएस सिंह देव के समर्थकों की मौजूदगी नगण्य रही। इसी बात से नाराज़ होकर टीएस समर्थकों ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया और कड़ा रुख अपनाया।
बताया जा रहा है कि भूपेश बघेल के स्वागत कार्यक्रम में शामिल रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को क्रमशः इस ग्रुप से हटाया जाने लगा। अब तक करीब एक दर्जन से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को “सरगुजा महाराज की कांग्रेस” नामक व्हाट्सएप ग्रुप से रिमूव किए जाने की चर्चा है।
“जो बाबा का नहीं, वह किसी का नहीं”
वायरल चैट्स में प्रयुक्त भाषा ने विवाद को और गहरा कर दिया है। कथित तौर पर ग्रुप में लिखा गया,
“जो बाबा का नहीं, वह किसी का नहीं। सरगुजा में कांग्रेस बाबा से चलती है।”
इस तरह के संदेशों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर दो धड़े अब खुलकर आमने-सामने आ गए हैं।
संगठन के लिए बढ़ती चिंता
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व ने समय रहते इस अंदरूनी कलह को नहीं संभाला, तो आने वाले समय में इसका सीधा असर संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। सरगुजा जैसे महत्वपूर्ण आदिवासी बहुल क्षेत्र में इस तरह की गुटबाजी विपक्ष को सीधा फायदा पहुंचा सकती है।
फिलहाल, व्हाट्सएप चैट्स के वायरल होने के बाद कांग्रेस के स्थानीय और प्रदेश नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है कि वह सामने आकर स्थिति को स्पष्ट करे और अनुशासनहीनता पर कार्रवाई करे। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस गहराती गुटबाजी को किस तरह संभालती है, या फिर यह विवाद और बड़ा राजनीतिक रूप लेता है।

