(CG ई खबर |कोरबा जिला संवाददाता: नारायण चंद्राकर)
छत्तीसगढ़ |जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के एक सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के बाद आदिवासी महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज, डॉक्टरों की मौजूदगी और आवश्यक मेडिकल सपोर्ट नहीं मिलने के कारण मां और बच्चे की जान चली गई।
क्या है पूरा मामला
परिजनों के अनुसार, प्रसव पीड़ा होने पर महिला को देर रात सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में सामान्य डिलीवरी कराई गई, लेकिन इसके कुछ समय बाद ही महिला की हालत बिगड़ने लगी। आरोप है कि लंबे समय तक न तो डॉक्टर मौके पर पहुंचे और न ही गंभीर स्थिति को देखते हुए समय पर रेफर किया गया।
इसी बीच कुछ ही घंटों में नवजात की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि बच्चे की हालत बिगड़ने के बावजूद समुचित इलाज नहीं मिला। इसके बाद महिला की स्थिति और गंभीर हो गई और थोड़ी देर बाद उसने भी दम तोड़ दिया।
अस्पताल परिसर में हंगामा
घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए। गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कुछ देर के लिए अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया, जिसे पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में शांत कराया गया।
परिजनों का आरोप
मृतका के परिजनों ने कहा—
“डिलीवरी के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। डॉक्टर देर से आए और तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अगर समय पर इलाज और रेफर किया जाता, तो मां और बच्चे की जान बच सकती थी।”
परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सभी तथ्यों की प्रारंभिक जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं, जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने मामले की जांच के आदेश देने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं चिकित्सकीय लापरवाही हुई है या नहीं।
आगे क्या होगा
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की नजर बनी हुई है।
— CG ई खबर











