नेता प्रतिपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल, कलेक्टर व सभापति को पत्र लिखकर नियम उल्लंघन का लगाया आरोप
(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)
कोरबा, 7 जनवरी 2026।
नगर निगम कोरबा में स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निगम की सामान्य सभा पिछले सात महीनों से आयोजित नहीं होने के कारण न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और शहर के विकास कार्यों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस पूरे मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू ने निगम सभापति एवं जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर तत्काल सामान्य सभा बुलाने की मांग की है।
नियमों का खुला उल्लंघन
नेता प्रतिपक्ष द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम के तहत प्रत्येक दो माह में सामान्य सभा का आयोजन अनिवार्य है। इसके बावजूद नगर निगम कोरबा की अंतिम सामान्य सभा 2 मई 2025 को आयोजित हुई थी। इसके बाद लगभग सात महीने बीत जाने के बावजूद एक भी सामान्य बैठक नहीं बुलाई गई, जबकि इस अवधि में कम से कम तीन से चार सामान्य सभाएं होनी चाहिए थीं।
जनहित और विकास कार्य प्रभावित
कृपाराम साहू ने कहा कि सामान्य सभा ही वह मंच है, जहां शहर के विकास कार्यों, बजट प्रस्तावों, योजनाओं और नागरिकों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा होती है। सामान्य सभा के न होने से पार्षदों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल रहा है, जो सीधे-सीधे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे शहर के विकास की गति भी प्रभावित हो रही है।
चेतावनी भरा रुख
नेता प्रतिपक्ष ने निगम सभापति से मांग की है कि अविलंब सामान्य सभा बुलाने के निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि शीघ्र बैठक आयोजित नहीं की गई, तो यह मामला गंभीर राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है। उनके इस बयान से निगम में राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे प्रकरण पर अभी तक नगर निगम सभापति या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की इस चुप्पी ने संदेह और गहरा कर दिया है कि आखिर सामान्य सभा न बुलाए जाने के पीछे क्या वजह है।
मुख्य बिंदु एक नजर में:
- कानून: छत्तीसगढ़ नगर निगम अधिनियम के अनुसार हर दो माह में सामान्य सभा अनिवार्य।
- वर्तमान स्थिति: अंतिम सामान्य सभा 2 मई 2025 को हुई, तब से करीब 7 माह से कोई बैठक नहीं।
- आरोप: नियमों का उल्लंघन, लोकतांत्रिक प्रक्रिया ठप, जनहित की अनदेखी।
- मांग: नेता प्रतिपक्ष द्वारा तत्काल सामान्य सभा बुलाने की मांग।
- आशंका: मामला बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।

