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अवैध राखड़ माफिया का उपद्रव: हाइवा ने तोड़े बिजली के खंभे, दादर-ढेलावडीह अंधेरे में डूबा


(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)

कोरबा, दादर/ढेलावडीह। अवैध राखड़ परिवहन में संलिप्त माफियाओं की बेलगाम गतिविधियों ने एक बार फिर आमजन को भारी परेशानी में डाल दिया है। बीती रात ढेलावडीह बस्ती क्षेत्र में अवैध राखड़ से लदा एक हाइवा वाहन अनियंत्रित होकर कई बिजली के खंभों से जा टकराया, जिससे दादर-ढेलावडीह समेत आसपास के कई गांवों की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई।

रात में हुआ हादसा, इलाके में मचा हड़कंप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 25 अंतर्गत ढेलावडीह बस्ती से रात के अंधेरे में अवैध राखड़ का परिवहन किया जा रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार हाइवा वाहन ने सड़क किनारे लगे बिजली के खंभों को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के तुरंत बाद पूरे क्षेत्र में अंधेरा छा गया और ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।


ग्रामीणों में भारी आक्रोश

घटना से स्थानीय ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। उनका कहना है कि रिहायशी इलाकों में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित होने के बावजूद राखड़ माफिया के वाहन बेखौफ होकर दौड़ रहे हैं। इससे न सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, बल्कि वायु प्रदूषण और सार्वजनिक संपत्ति को भी लगातार नुकसान पहुंच रहा है।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

इस घटना ने प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अवैध राखड़ परिवहन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

ग्रामीणों की चार सूत्रीय मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की है, जिसमें शामिल हैं—

  1. अवैध राखड़ परिवहन पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध।
  2. रिहायशी इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्ती।
  3. हादसे के जिम्मेदार वाहन मालिक और चालकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई।
  4. क्षतिग्रस्त विद्युत व्यवस्था की शीघ्र मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल करना।

बिजली बहाली में लगे विभागीय कर्मचारी

घटना की सूचना विद्युत विभाग और प्रशासन को दे दी गई है। विभागीय अमला मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है, हालांकि बिजली बहाली में अभी समय लगने की संभावना जताई जा रही है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस घटना को गंभीरता से लेकर अवैध राखड़ माफिया पर शिकंजा कसेगा, या फिर ग्रामीणों को यूं ही अंधेरे और खतरे के साए में जीने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


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