कोरबा (CG ई खबर | दर्री ब्लॉक रिपोर्टर : सरस्वती मरकाम)
हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की पहल पैदल चलने वालों को वाहन से घर तक छोड़ा जा रहा, ग्रामीणों को दी जा रही सतर्कता की समझाइश
कोरबा। कोरबा जिला वन विभाग द्वारा हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर एक सराहनीय पहल की जा रही है। हाथियों की सक्रियता वाले इलाकों में रात के समय सड़क पर पैदल चलने वाले लोगों को वन विभाग की टीम वाहन से सुरक्षित उनके घर तक छोड़ रही है। इसके साथ ही दिन के समय ग्रामीणों के घर-घर जाकर जंगल न जाने और शाम ढलते ही घर से बाहर न निकलने की समझाइश भी दी जा रही है।
वनांचल क्षेत्रों में इन दिनों बार महोत्सव और गौरा-गौरी उत्सव के चलते देर रात तक लोगों की आवाजाही बनी हुई है, जिससे हाथियों के साथ टकराव का खतरा बढ़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
वन मंडल कटघोरा क्षेत्र में वर्तमान में 53 हाथी जटगा, एतमानगर और केंदई रेंज में विचरण कर रहे हैं। वहीं कोरबा वन मंडल में अभी 11 हाथी मौजूद हैं। कुदमुरा रेंज में घूम रहा दंतैल हाथी वापस धरमजयगढ़ वनमंडल लौट गया है, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। करतला रेंज के चिकनीपाली क्षेत्र में 9 हाथी तथा कोटमेर क्षेत्र में 2 हाथी सक्रिय हैं। बताया गया है कि पिछले वर्ष दिसंबर में लोगों पर हमला करने वाला दंतैल हाथी अब झुंड में शामिल होने के बाद शांत हो गया है।
डीएफओ प्रेमलता यादव के निर्देश पर प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी के लिए अन्य रेंज के अधिकारियों और कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। प्रमुख मार्गों पर रात के समय लगातार गश्त की जा रही है। इस दौरान यदि कोई व्यक्ति पैदल यात्रा करता हुआ पाया जाता है तो उसे वन विभाग की टीम द्वारा सुरक्षित उसके घर तक पहुंचाया जाता है।
इसी क्रम में तिलाईडबरा निवासी रामसागर रात के समय पैदल गांव लौट रहा था, जिसे वन विभाग की टीम ने सुरक्षित उसके घर तक छोड़ा। उल्लेखनीय है कि इसी क्षेत्र में पिछले वर्ष रात के समय दो ग्रामीण दंतैल हाथी की चपेट में आ चुके हैं।
एसडीओ एस.के. सोनी ने बताया कि वर्तमान में हाथी अधिकांश समय जंगल के भीतर ही रह रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुनादी कर सतर्क रहने की अपील की जा रही है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से रात में बाहर न निकलें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें।











