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कोरबा DMF घोटाले पर सियासत गरम, केंद्र ने राज्य से पूछा – निर्देशों पर अमल क्यों नहीं?


(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)

Korba DMF Misuse | CG Politics कोरबा जिले में जिला खनिज न्यास (DMF) राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर सियासत तेज हो गई है। मामले में पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर ने केंद्र सरकार तक शिकायत भेज दी है। शिकायत के बाद केंद्र सरकार के खनन मंत्रालय ने राज्य प्रशासन से सीधे सवाल किया है कि जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक अमल क्यों नहीं हुआ।

पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि बालको समूह को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दरी डेम से बालको परसाभाटा तक DMF राशि से सड़क निर्माण कराया गया, जो नियमों के विरुद्ध है। कंवर ने केंद्र से मांग की है कि इस निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

केंद्र ने दो बार दिए निर्देश, फिर भी कार्रवाई शून्य

खनन मंत्रालय ने कंवर के पत्र पर संज्ञान लेते हुए वर्ष 2025 में अगस्त और नवंबर माह में राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राज्य स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब केंद्र सरकार ने मौजूदा मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले की जांच कर कार्रवाई रिपोर्ट शीघ्र भेजने को कहा है।

तत्कालीन कलेक्टर पर भी आरोप

पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर का दावा है कि इस कथित DMF घोटाले में कोरबा के तत्कालीन कलेक्टर अजीत वसंत की भूमिका भी संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक संरक्षण में नियमों को ताक पर रखकर DMF राशि का उपयोग किया गया।

विपक्ष का तंज, सत्ता पक्ष पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्ष हमलावर है। विपक्ष का कहना है कि अगर एक पूर्व गृहमंत्री की अपनी ही सरकार में सुनवाई नहीं हुई, तो आम आदमी की क्या सुनवाई होगी? सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर राज्य का मामला होने के बावजूद एक वरिष्ठ नेता को केंद्र सरकार तक क्यों जाना पड़ा।

राजनीतिक बयानबाज़ी तेज

कांग्रेस ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने तंज कसते हुए कहा कि “इन दिनों ननकी राम कंवर की स्थिति म्यूजियम में रखी वस्तु जैसी हो गई है।”
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को ओछी राजनीति करार दिया है।

कांग्रेस ने ननकी राम कंवर के पत्र को एक और “लेटर बम” बताते हुए बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार पर लगाम न कस पाने और केंद्र के निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाया है।

बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्पष्ट केंद्रीय निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?
क्या किसी को बचाने की कोशिश हो रही है, या फिर इस बार केंद्र के दबाव में सरकार सचमुच कार्रवाई करेगी?

कोरबा DMF मामले ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी घमासान और तेज होने के आसार हैं।

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