छत्तीसगढ़ / कोरबा (CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल) : कोरबा जिला पुलिस बल में जल्द ही एक नया साइबर पुलिस थाना अस्तित्व में आने जा रहा है। इसकी विभागीय घोषणा पहले ही हो चुकी है, हालांकि अभी तक संसाधनों की उपलब्धता और भवन के साथ इसका औपचारिक उद्घाटन होना शेष है। साइबर थाना गठन की घोषणा के बाद से ही पुलिस महकमे और आमजन के बीच कई तरह की चर्चाएं और सवाल तेज़ हो गए हैं।
बीते दिनों एक सूची के लीक होकर वायरल होने के बाद यह चर्चा और भी तेज़ हो गई कि साइबर थाना के गठन के साथ क्या वास्तव में टीम और व्यवस्था सशक्त होगी या फिर पुराने ढर्रे पर ही काम चलता रहेगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि साइबर पुलिस थाना का पहला प्रभारी कौन होगा?
क्या साइबर थाना का प्रभारी निरीक्षक (Inspector) स्तर का अधिकारी बनाया जाएगा या फिर केवल आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना के लिए अन्य संबंधित थानों को प्रकरण भेजने की औपचारिकता निभाई जाएगी?
पुलिस सूत्रों की मानें तो साइबर पुलिस थाना का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के अंतर्गत आने वाले अपराधों की गंभीर समीक्षा, तकनीकी जांच और प्रभावी विवेचना करना होता है। ऐसे में थाना प्रभारी और विवेचना अधिकारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
महकमे के भीतर यह चर्चा भी आम है कि जब साइबर सेल से आगे बढ़कर पूर्ण रूप से साइबर थाना स्थापित किया जा रहा है, तो इसकी शुरुआत भी मजबूत, स्पष्ट और कानूनी रूप से निर्विवाद होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर विवेचनागत शंका या कानूनी कमजोरी आगे चलकर पूरे मामले को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल यह कहना गलत नहीं होगा कि वर्तमान साइबर टीम पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के मार्गदर्शन में अच्छा कार्य कर रही है, लेकिन जब बात थाना गठन, अधिनियम और अधिकारों की आती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगला निरीक्षक कौन होगा और योग्य अधिकारियों को कब अवसर मिलेगा।
यह कहता है अधिनियम (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000)
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) देश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए बनाया गया एक प्रमुख कानून है। इसमें साइबर अपराधों की परिभाषा, दंड, जांच और अभियोजन से संबंधित प्रावधान स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।
धारा 78 – अपराधों की जांच की शक्ति
राजपत्रित स्तर के एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, आईटी एक्ट की धारा 78 में साफ तौर पर उल्लेख है कि—
“दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अन्वेषण वही पुलिस अधिकारी करेगा, जो निरीक्षक (Inspector) की पंक्ति से नीचे का न हो।”
अर्थात,
- आईटी एक्ट के अंतर्गत दर्ज होने वाले किसी भी अपराध की विवेचना का अधिकार केवल निरीक्षक या उससे उच्च पद के अधिकारी को ही है।
- सब-इंस्पेक्टर या उससे नीचे के अधिकारी को इस अधिनियम के तहत स्वतंत्र रूप से जांच करने की शक्ति प्रदान नहीं की गई है।
इसी कारण यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि यदि साइबर पुलिस थाना का प्रभारी निरीक्षक स्तर का अधिकारी नहीं होता, तो क्या विवेचना को लेकर भविष्य में कानूनी अड़चनें खड़ी हो सकती हैं?
निष्कर्ष
साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कोरबा में साइबर पुलिस थाना का गठन एक महत्वपूर्ण और स्वागतयोग्य कदम है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि थाना प्रभारी और विवेचना टीम का चयन आईटी एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप किया जाए।
अब देखना यह होगा कि साइबर थाना के उद्घाटन के साथ वास्तव में चेहरे और व्यवस्था बदलती है, या फिर केवल नाम बदलकर वही पुरानी कार्यप्रणाली आगे बढ़ाई जाती है।











