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NEP 2020 से शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव, 2026 से स्कूल–कॉलेज स्तर पर दिखेगा बड़ा असर


(CG ई खबर | कटघोरा ब्लॉक संवाददाता: पिंकी महंत)

नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और आधुनिक शिक्षण तकनीकों के चलते भारत की शिक्षा व्यवस्था तेज़ी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। आने वाला वर्ष 2026 शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े और दूरगामी फैसलों के लिए अहम माना जा रहा है, जो छात्रों, शिक्षकों और संस्थानों—तीनों के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रहे हैं।

2026: शिक्षा व्यवस्था में बड़े फैसलों का साल

2026 से स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक कई महत्वपूर्ण परिवर्तन लागू होने जा रहे हैं। इनमें प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं—

10वीं में दो बार बोर्ड परीक्षा:
CBSE द्वारा 2026 से कक्षा 10वीं में दो बार बोर्ड परीक्षा का प्रयोग शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों का तनाव कम करना और उन्हें बेहतर प्रदर्शन का दूसरा अवसर देना है।

स्कूलों में AI की पढ़ाई:
अप्रैल 2026 से नए शैक्षणिक सत्र में कक्षा 3 से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शिक्षा शुरू होगी। गुजरात सरकार ने भी 2026–27 से कक्षा 3 से 12 तक AI पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है।

शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण:
नए पाठ्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। CBSE ने NEP 2020 के तहत हिंदी, STEM शिक्षा और खेल-आधारित शिक्षण सहित 14 नए क्षमता विकास कार्यक्रम (CBPs) शुरू किए हैं।

भारत में विदेशी विश्वविद्यालय:
अब तक 19 से अधिक विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी मिल चुकी है। 2026 तक बिजनेस, AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों वाले नए कैंपस खुलने की संभावना है।

नई पाठ्यपुस्तकें:
2026–27 के शैक्षणिक सत्र से पहले कक्षा 9 से 12 तक की नई पाठ्यपुस्तकें लागू होंगी, जो नए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे पर आधारित होंगी।

तकनीक और शिक्षा का एकीकरण

NEP 2020 का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक शिक्षा और आधुनिक तकनीक का समन्वय करना है, जिसे टेक्नो-पैडागॉजी कहा जा रहा है। इसके तहत—

  • व्यवहार तकनीकी: मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित, छात्रों और शिक्षकों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव पर केंद्रित।
  • अनुदेशन तकनीकी: कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और AI टूल्स के जरिए पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाना।
  • शिक्षण रचना: छात्रों की जरूरतों के अनुसार उपयुक्त तकनीक और शिक्षण रणनीतियों का चयन कर सार्थक शिक्षण अनुभव तैयार करना।

सरकारी स्तर पर CIET–NCERT जैसे संस्थान शिक्षकों के लिए “प्रौद्योगिकी–शिक्षण पद्धति एकीकरण” जैसे विषयों पर निःशुल्क ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं, ताकि डिजिटल शिक्षा को ज़मीनी स्तर पर मजबूत किया जा सके।

चुनौतियाँ और आगे की राह

हालांकि ये बदलाव शिक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में हैं, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी सामने हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में हालिया सुधारों की प्रभावशीलता 2026 में परखी जाएगी। वहीं उच्च शिक्षा के लिए प्रस्तावित एकीकृत नियामक विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल पर अभी चर्चा जारी है। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारना और शिक्षा पर बढ़ते निजी खर्च की चुनौती बनी हुई है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, नई शिक्षा नीति रटंत प्रणाली से आगे बढ़कर रचनात्मक, तकनीक-समर्थित और छात्र-केंद्रित शिक्षा की ओर देश को ले जा रही है। शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल ढांचे पर विशेष ध्यान देकर इस नीति को धरातल पर उतारने की ठोस कोशिश की जा रही है।

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