(CGई खबर। कटघोरा ब्लॉक संवाददाता: पिंकी महंत)
कोरबा / कटघोरा। समाज के समावेशी विकास की दिशा में दिव्यांगजनों के लिए समर्पित सामुदायिक एवं मंगल भवनों की मांग एक महत्वपूर्ण और समयोचित विषय बनकर सामने आई है। दिव्यांग व्यक्तियों को सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में समान भागीदारी दिलाने के लिए ऐसे भवनों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
वर्तमान में अधिकांश सामुदायिक व मंगल भवन दिव्यांग अनुकूल नहीं हैं, जिससे उन्हें विवाह, सामाजिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि विशेष रूप से दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर भवनों का निर्माण किया जाए, तो यह उनके गरिमापूर्ण जीवन और सामाजिक सहभागिता को मजबूती देगा।
मुख्य बिंदु:
सामाजिक समावेशन:
दिव्यांगों के लिए समर्पित भवन उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और सामाजिक अलगाव को कम करने में सहायक होंगे।
सुविधा और पहुंच:
रैंप, व्हीलचेयर फ्रेंडली प्रवेश, ब्रेल साइन, विशेष शौचालय और ऑडियो-वीडियो संकेत जैसी सुविधाएं शारीरिक व संवेदी बाधाओं को दूर करेंगी।
सामाजिक गतिविधियों का केंद्र:
विवाह, पारिवारिक समारोह, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सामुदायिक बैठकों के लिए सुगम और सुरक्षित स्थान उपलब्ध होगा।
सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन:
दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत समान अवसर और सुगम वातावरण उपलब्ध कराने की भावना को वास्तविक रूप मिलेगा।
मीडिया की भूमिका:
मीडिया द्वारा इस तरह के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना न केवल समाज में जागरूकता बढ़ाता है, बल्कि जनप्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं का ध्यान भी आकर्षित करता है। इससे दिव्यांग समुदाय से जुड़े विषयों पर ठोस नीतिगत निर्णय लेने का मार्ग प्रशस्त होता है।
कुल मिलाकर, दिव्यांगों के लिए सामुदायिक और मंगल भवनों की मांग केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। इस दिशा में सकारात्मक पहल समावेशी और संवेदनशील समाज के निर्माण की ओर एक मजबूत कदम साबित होगी।

