चुराचंदपुर (मणिपुर)। मणिपुर में नई सरकार के गठन के अगले ही दिन हिंसा भड़कने की खबर सामने आई है। दक्षिणी मणिपुर के चुराचंदपुर जिले में शुक्रवार को हालात अचानक बिगड़ गए, जहां कुकी समुदाय से जुड़े प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। राष्ट्रपति शासन हटने के बाद शांति और स्थिरता की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए यह घटनाक्रम चौंकाने वाला साबित हुआ है।
क्या है पूरा मामला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नई सरकार के कार्यभार संभालते ही चुराचंदपुर के कुछ इलाकों में असंतोष उभर आया। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर पथराव किया, जिसके जवाब में पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।
आगजनी और तोड़फोड़ से बढ़ा तनाव
हालात उस समय और गंभीर हो गए जब कुछ उपद्रवी तत्वों ने कई जगहों पर आगजनी की। स्थानीय दुकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचाए जाने की भी खबर है। पथराव और आगजनी के चलते इलाके में अफरा-तफरी मच गई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो गया। एहतियातन कई संवेदनशील इलाकों में बाजार बंद करा दिए गए और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई।
हिंसा की वजह क्या?
मिली जानकारी के मुताबिक, कुकी समुदाय से जुड़े संगठनों ने नई सरकार और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए प्रदर्शन किया था। उनका आरोप है कि उनकी मांगों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हालात बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और कानून व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।
प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा बढ़ाई गई
हिंसा की सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों को चुराचंदपुर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन का दावा है कि हालात धीरे-धीरे नियंत्रण में लाए जा रहे हैं, हालांकि इलाके में तनाव अब भी बना हुआ है।
सरकार के लिए बड़ी चुनौती
लंबे समय से जातीय तनाव से जूझ रहे मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद शांति की उम्मीद थी, लेकिन नई सरकार के गठन के तुरंत बाद हुई हिंसा ने उन उम्मीदों को झटका दिया है। राज्य सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बहाल करना और सभी समुदायों का भरोसा जीतना अब बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।











