नई दिल्ली | CG ई खबर | बॉलीवुड : पिछले 11 दिनों से तिहाड़ जेल में बंद बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को सोमवार को से अंतरिम जमानत मिल गई। कोर्ट ने उन्हें कुछ सख्त शर्तों के साथ 18 मार्च 2026 तक रिहाई की अनुमति दी है। राजपाल यादव 2018 के एक चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे थे। भुगतान शर्तों को पूरा नहीं करने के कारण फरवरी के पहले सप्ताह में उन्हें में आत्मसमर्पण करना पड़ा था।
जमानत के बाद मीडिया से बोले राजपाल यादव
तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद राजपाल यादव ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा,
“कोई भी लीगल जानकारी लेनी हो तो आप हमारे वकील से पूछ सकते हैं। 2027 में मुझे बॉलीवुड में 30 साल पूरे हो जाएंगे। भारतीय सिनेमा का हर बच्चा और बुजुर्ग मेरे साथ है। पिछले 10 वर्षों में कोर्ट ने जहां-जहां बुलाया, मैं वहां उपस्थित हुआ हूं। मुझ पर अगर कोई आरोप है तो मैं कोर्ट के सामने आने के लिए हमेशा तैयार हूं।”
शर्तों पर मिली अंतरिम राहत
बीते सप्ताह दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 करोड़ रुपये के भुगतान न होने के कारण राजपाल यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि सोमवार को कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए अंतरिम जमानत मंजूर की।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह रिहाई 18 मार्च तक के लिए ही है। अभिनेता को 19 फरवरी को अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए शाहजहांपुर जाने की अनुमति दी गई है।
राजपाल यादव के वकील ने कोर्ट को बताया कि 1.5 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा कर दिया गया है। साथ ही अदालत ने उनका पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया है और बिना अनुमति देश से बाहर जाने पर रोक लगाई गई है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।
भुगतान शर्तें पूरी न करने पर सख्ती
कोर्ट ने पहले यह मानते हुए सख्त रुख अपनाया था कि राजपाल यादव बार-बार भुगतान में देरी कर रहे हैं। शिकायतकर्ता कंपनी Murli Projects Private Limited को तय समझौते के तहत राशि चुकाने का वादा पूरा नहीं हो पाया था।
इससे पहले जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा ने टिप्पणी की थी कि राजपाल यादव केवल अदालत के आदेश से नहीं, बल्कि समझौते की शर्तों का पालन न करने के कारण जेल में हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, राजपाल यादव ने वर्ष 2010 में करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। यह रकम उन्होंने अपने डायरेक्शन प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए ली थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी, जिसके बाद वे कर्ज चुकाने में असमर्थ रहे।
इसके चलते चेक बाउंस हुए और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। जुर्माना और ब्याज जुड़ने के बाद कुल बकाया राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
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