📰 CG ई खबर | कोरबा/बिलासपुर : कोरबा / बिलासपुर। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों से निपटने और विवेचना की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 24 मार्च 2026 को बिलासपुर रेंज में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पुलिस महानिरीक्षक के मार्गदर्शन में स्थानीय चेतना हॉल में आयोजित हुई।
कार्यक्रम में (उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर) और (पुलिस अधीक्षक, जांजगीर-चांपा) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
तकनीक ही भविष्य: अधिकारियों को दिया गया संदेश
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर आईजी ने कहा कि “तकनीक ही भविष्य है और इसमें दक्षता पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रख सकती है।”
वहीं ने साइबर अपराधों की रोकथाम में आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
गृह मंत्रालय की नई SOP पर विशेष चर्चा
कार्यशाला में द्वारा जनवरी 2026 में जारी नई SOP पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस दौरान (नगर पुलिस अधीक्षक, कोतवाली) ने ठगी के मामलों में पैसों की होल्डिंग और रिकवरी प्रक्रिया पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया।
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में कई अहम विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी:
- नेटग्रिड का उपयोग: ने नेटग्रिड के उपयोग और महत्व को समझाया।
- सायबर फॉरेंसिक: दुर्ग से आए विशेषज्ञ ने साइबर फ्रॉड, डिजिटल साक्ष्य और डार्क नेट से जुड़ी जानकारी लाइव डेमो के माध्यम से साझा की।
- आधुनिक टूल्स: CDR एनालिसिस, C-Trace और अन्य सशक्त एप्स के जरिए अपराध जांच को तेज और सटीक बनाने पर जोर दिया गया।
विवेचना को आधुनिक बनाने पर जोर
कार्यक्रम में ने कहा कि बदलते समय के साथ पुलिस विवेचना को भी आधुनिक तकनीकों के अनुरूप विकसित करना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
इस कार्यशाला के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच प्रक्रिया में सुधार और नई तकनीकों के प्रभावी उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशिक्षण मिला। इससे भविष्य में साइबर अपराधों पर नियंत्रण और तेज कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
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