CG ई खबर डॉनेट

Ads-Google

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखी दुर्लभ उड़न गिलहरी, संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता


रायपुर/गरियाबंद, जून 2026।
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। हाल ही में रिजर्व क्षेत्र में आयोजित वन भ्रमण के दौरान दुर्लभ इंडियन फ्लाइंग स्क्विरल (भारतीय उड़न गिलहरी) देखी गई है। इस दुर्लभ जीव की मौजूदगी ने वन विभाग के अधिकारियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह का माहौल बना दिया है।

वन विभाग के अनुसार यह उपलब्धि प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा वरिष्ठ वन अधिकारियों के संरक्षण प्रयासों से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल के रूप में विकसित हो रहा है।

उड़न गिलहरी की खासियत

इंडियन फ्लाइंग स्क्विरल अपनी अनोखी क्षमता के कारण वन्यजीवों की दुनिया में विशेष पहचान रखती है। यह पक्षियों की तरह उड़ान नहीं भरती, बल्कि अपने आगे और पीछे के पैरों के बीच मौजूद त्वचा की झिल्ली की सहायता से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी दूरी तक ग्लाइड करती है।

यह एक निशाचर जीव है, जो दिनभर पेड़ों के खोखलों में विश्राम करता है और रात के समय भोजन एवं गतिविधियों के लिए बाहर निकलता है। विशेषज्ञों के अनुसार उड़न गिलहरी केवल घने, पुराने और जैव विविधता से भरपूर जंगलों में ही पाई जाती है। ऐसे में इसका दिखाई देना इस बात का प्रमाण है कि उदंती-सीतानदी का वन पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और समृद्ध है।

अधिकारियों ने जताई खुशी

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक श्री वरुण जैन ने कहा कि उड़न गिलहरी का दिखाई देना रिजर्व के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि यह जंगलों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। वन विभाग वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए लगातार कार्य कर रहा है।


पर्यटन और जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दुर्लभ प्रजाति की उपस्थिति से न केवल जैव विविधता संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रकृति पर्यटन और वन्यजीव जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ जीवों की मौजूदगी प्रदेश को वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में सहायक साबित हो सकती है।

उड़न गिलहरी की यह दुर्लभ झलक एक बार फिर साबित करती है कि छत्तीसगढ़ के जंगल जैव विविधता के अनमोल खजाने हैं और इनके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।

Top Post Ad

Below Post Ad

Ads


ads