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कुसमुंडा में ठेका मजदूरों का शक्ति प्रदर्शन, नियमितीकरण की मांग पर सीएमडी मुख्यालय घेराव का ऐलान


कुसमुंडा में ठेका मजदूरों का ऐतिहासिक महासभा, तीन बड़े प्रस्ताव पारित; सीएमडी मुख्यालय घेराव का ऐलान

कुसमुंडा/कोरबा, 13 जून (CG ई खबर)। राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) के वरिष्ठ नेता प्रो. भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर शुक्रवार को कुसमुंडा स्थित महतारी अंगना (कबीर चौक) में ठेका मजदूर महासभा का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। महासभा में एसईसीएल एवं विभिन्न कोयला खदानों में कार्यरत बड़ी संख्या में ठेका श्रमिकों, मजदूर प्रतिनिधियों और श्रमिक संगठनों ने भाग लेकर अपने अधिकारों की लड़ाई को और मजबूत करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. भागवत प्रसाद दुबे, मोहम्मद नासिर खान, भावेन्द्र तिवारी, यूबीकेकेएस संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप, सीकेएस (गैर-राजनीतिक संगठन) के अतुल दास महंत, उमा गोपाल, गोंडवाना पार्टी के गणेश सिंह ऊईके तथा समाजसेवी अनुसुईया राठौर सहित अनेक श्रमिक नेता उपस्थित रहे।


कोयला उद्योग की रीढ़ हैं ठेका मजदूर

महासभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कोयला खदानों की मुख्य गतिविधियों जैसे ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, डम्पर संचालन, रूफ बोल्टिंग और कोयला उत्खनन में ठेका श्रमिक दिन-रात मेहनत करते हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और अधिकार नहीं मिल रहे हैं। नेताओं ने सभी मजदूरों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।

सर्वसम्मति से पारित हुए तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव

महासभा में श्रमिक हितों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।

पहला प्रस्ताव ओएसएचडब्ल्यूसी (OSHWC) कोड-2020 की धारा 57 को प्रभावी रूप से लागू करने तथा खदानों की कोर गतिविधियों में ठेका प्रथा समाप्त कर ठेका श्रमिकों को चरणबद्ध तरीके से एसईसीएल के नियमित कर्मचारी का दर्जा देने की मांग से संबंधित रहा।

दूसरे प्रस्ताव में केंद्र सरकार से मांग की गई कि कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट-1970 के नियम 25(2)(v)(a) के तहत "समान कार्य के लिए समान वेतन" और ठेका प्रथा समाप्ति से जुड़े प्रावधानों को नए श्रम कानूनों में भी शामिल किया जाए।

तीसरे प्रस्ताव में नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट (NCWA-IV) की कंडिका 11.5.1 का हवाला देते हुए स्थायी प्रकृति के कार्यों में ठेका श्रमिकों की नियुक्ति बंद कर उन्हें एसईसीएल के ऑन-रोल कर्मचारी के रूप में समायोजित करने की मांग रखी गई।

जारी हुआ 'कुसमुंडा घोषणा-पत्र'

महासभा में ऐतिहासिक "कुसमुंडा घोषणा-पत्र" भी जारी किया गया। इसमें "स्थायी कार्य के लिए स्थायी रोजगार" और "समान कार्य, समान वेतन एवं समान सम्मान" के सिद्धांतों को प्रमुखता से रखा गया। घोषणा-पत्र में प्रत्येक ठेका श्रमिक को नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची, रोजगार कार्ड, सामाजिक सुरक्षा, आवास और चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की गई।

सीएमडी मुख्यालय घेराव की घोषणा

आरसीडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ नेता प्रो. भागवत प्रसाद दुबे ने महासभा में बड़े आंदोलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि जून से अगस्त 2026 तक सभी खदानों में कार्यरत ठेका मजदूरों का विस्तृत डेटा संग्रह किया जाएगा। इसके बाद श्रमिकों की मांगों को लेकर बिलासपुर स्थित एसईसीएल सीएमडी मुख्यालय का विशाल घेराव किया जाएगा और मांग-पत्र सौंपा जाएगा।

आयोजनकर्ताओं की सराहना

कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय श्रमिक नेताओं अशोक पटेल, गोविंदा सारथी, विनोद सारथी, संतोष चौहान, ललित महिलांगे, प्रकाश जायसवाल, महावीर यादव तथा छाल क्षेत्र के अजय सिंह ठाकुर सहित अन्य कार्यकर्ताओं की भूमिका की मंच से सराहना की गई।

समापन अवसर पर यूबीकेकेएस संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने सभी अतिथियों और मजदूरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मजदूरों के अधिकारों की यह लड़ाई अभी शुरुआत है और आने वाले दिनों में इसे और अधिक मजबूत एवं व्यापक बनाया जाएगा।

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