भोपाल। चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले में जांच से जुड़े नए दस्तावेज सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 13 मई को सुबह 9:42 बजे सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा द्वारा कथित लिगेचर को जब्त किया गया था। हालांकि दस्तावेजों में यह उल्लेख नहीं है कि आरोपी पक्ष के रूप में नामित गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने उसकी पहचान की थी या नहीं।
आरोप है कि जब्ती पंचनामे में उस व्यक्ति का भी कोई विवरण दर्ज नहीं किया गया, जिसने कथित लिगेचर की पहचान की हो। दस्तावेज के पांचवें कॉलम में केवल “घटनास्थल से” लिखकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। इससे जब्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले से जुड़े सूत्रों का दावा है कि जब्ती के बाद लिगेचर को तत्काल फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजने के बजाय सब इंस्पेक्टर द्वारा अपनी कार में रखा गया और समय पर एम्स नहीं भेजा गया। इसे जांच प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, लिगेचर से संबंधित जब्ती दस्तावेज केस डायरी का हिस्सा था, लेकिन उसमें दोनों आरोपियों की कोई भूमिका या उपस्थिति दर्ज नहीं है। वहीं, इसी दिन तैयार की गई तीन अन्य जब्ती कार्यवाहियों में समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह का पूरा विवरण दर्ज होने की बात सामने आई है।
इन तथ्यों के आधार पर जांच एजेंसी SIT की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि जांच एजेंसी ने शुरुआत से ही आरोपियों के प्रभाव में कार्य किया, जिसके कारण जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो रहा है।
हालांकि, इन आरोपों पर SIT या संबंधित अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में आगे की जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।

