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कुसमुंडा KNR कंपनी में फिर बड़ा हादसा: मिट्टी डंपिंग के दौरान पलटा 100 टन का डंपर, अप्रशिक्षित चालकों को भारी वाहन सौंपने के आरोपों से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)

वोल्वो चलाने वाले चालकों को महज ट्रायल के आधार पर 100 टन के भारी डंपर सौंपने के आरोप, बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र सत्यापन के वाहन संचालन की आशंका; आखिर श्रमिकों की जान से कब तक होगा खिलवाड़?

कोरबा/कुसमुंडा। CG ई खबर। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की कुसमुंडा खदान में नियोजित निजी ठेका कंपनी KNR की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बुधवार, 28 अक्टूबर की तड़के सुबह करीब 4 बजे बरपाली-खोडरी फेस में मिट्टी डंपिंग के दौरान एक भारी डंपर अनियंत्रित होकर पलट गया और नीचे जा गिरा। इस हादसे में डंपर चालक ने वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई, हालांकि उसे चोटें आने की जानकारी सामने आई है। घायल चालक को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया है।

मिट्टी अनलोड करते समय अचानक स्लाइड हुआ भारी डंपर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, KNR कंपनी का लगभग 100 टन वजनी बताया जा रहा डंपर बरपाली-खोडरी फेस में मिट्टी अनलोड करने पहुंचा था। इसी दौरान डंपिंग स्थल पर वाहन अचानक स्लाइड होकर नीचे जा गिरा। घटना इतनी गंभीर थी कि चालक को अपनी जान बचाने के लिए वाहन से कूदना पड़ा।

हादसे के बाद खदान में भारी वाहनों के संचालन, डंपिंग स्थल की मजबूती, सुरक्षा मानकों और वाहन चालकों की योग्यता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अप्रशिक्षित चालकों को महज ट्रायल देकर सौंपे जा रहे भारी डंपर?

इस हादसे के बीच KNR कंपनी में भारी वाहनों के संचालन को लेकर एक और गंभीर सवाल सामने आया है। आरोप है कि कंपनी में पर्याप्त प्रशिक्षण और अनुभव नहीं रखने वाले चालकों को भी महज ट्रायल के आधार पर बड़े डंपर चलाने की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है।

यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सामान्य वोल्वो या अन्य छोटे क्षमता वाले भारी वाहन चलाने का अनुभव रखने वाले चालकों को सीधे अधिक क्षमता वाले खदान डंपर चलाने की अनुमति दी जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन चालकों के पास संबंधित श्रेणी के खनन वाहन चलाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, दक्षता और अधिकृत प्रमाणपत्र मौजूद हैं?

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कंपनी प्रबंधन और संबंधित खदान अधिकारियों से दस्तावेजों के आधार पर इनकी जांच किया जाना आवश्यक है।

चालकों के प्रमाणपत्र और अनुभव की जांच होती है या सिर्फ ट्रायल लेकर पूरी कर दी जाती है औपचारिकता?

खदान में चलने वाले विशाल डंपर सामान्य सड़क परिवहन के भारी वाहनों से अलग होते हैं। इनका संचालन विशेष तकनीकी जानकारी, पर्याप्त प्रशिक्षण, सुरक्षा नियमों की समझ और व्यावहारिक दक्षता की मांग करता है।

ऐसे में यदि बिना आवश्यक योग्यता सत्यापन और प्रशिक्षण के किसी चालक को विशाल डंपर की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो यह न केवल चालक बल्कि आसपास काम करने वाले अन्य श्रमिकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

अब सवाल यह है कि KNR कंपनी में डंपर चालकों की नियुक्ति और वाहन आवंटन से पहले उनके प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, अनुभव और दक्षता की जांच किस स्तर पर की जाती है? क्या कंपनी के पास प्रत्येक चालक का प्रशिक्षण रिकॉर्ड मौजूद है? क्या खदान प्रबंधन नियमित रूप से इन दस्तावेजों का सत्यापन करता है?

डंपिंग स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे गंभीर सवाल

हादसे का कारण केवल चालक की गलती मान लेना उचित नहीं होगा। खदान में मिट्टी डंपिंग के दौरान जमीन की मजबूती, डंपिंग किनारे की स्थिति, पर्याप्त सुरक्षा अवरोध, रोशनी और निगरानी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है।

विशेषकर रात और तड़के सुबह के समय भारी डंपरों का संचालन अतिरिक्त सतर्कता की मांग करता है। ऐसे में यह जांच आवश्यक है कि दुर्घटना के समय डंपिंग स्थल पर निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध थी या नहीं।

SECL और DGMS से निष्पक्ष जांच की मांग का सवाल

इस घटना के बाद SECL कुसमुंडा प्रबंधन, संबंधित सुरक्षा अधिकारियों और खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

जरूरी है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की तकनीकी जांच के साथ-साथ KNR कंपनी में कार्यरत भारी डंपर चालकों की योग्यता, प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, अनुभव और वाहन संचालन की अनुमति संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जाए।

यदि जांच में बिना पर्याप्त प्रशिक्षण या आवश्यक प्राधिकरण के चालकों से भारी वाहन संचालित कराए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

कोयला उत्पादन की रफ्तार के बीच आखिर कितनी सुरक्षित है श्रमिकों की जिंदगी?

कुसमुंडा जैसी विशाल कोयला खदान में प्रतिदिन अनेक भारी वाहन संचालित होते हैं। इन वाहनों के आसपास चालक, ऑपरेटर, तकनीकी कर्मचारी और अन्य श्रमिक काम करते हैं। ऐसी स्थिति में सुरक्षा मानकों की छोटी-सी अनदेखी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

इस घटना में चालक की जान बच गई, लेकिन सवाल यह है कि यदि डंपर के आसपास अन्य कर्मचारी मौजूद होते या चालक समय रहते बाहर नहीं निकल पाता, तो परिणाम कितना भयावह हो सकता था?

सबसे बड़ा सवाल — क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही जागेगा प्रबंधन?

KNR कंपनी में हुए इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उत्पादन के दबाव के बीच श्रमिकों की सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता दी जा रही है?

क्या भारी डंपर चलाने वाले सभी चालक आवश्यक रूप से प्रशिक्षित और अधिकृत हैं? क्या सिर्फ ट्रायल पास कर लेने को ही बड़े खनन वाहनों के संचालन के लिए पर्याप्त माना जा रहा है? और यदि ऐसा हो रहा है, तो इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है?

फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों, चालक की योग्यता और डंपिंग स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं।

CG ई खबर का सवाल: आखिर कुसमुंडा खदान में भारी वाहनों के संचालन और श्रमिकों की सुरक्षा की जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या SECL प्रबंधन और संबंधित खान सुरक्षा अधिकारी इस हादसे की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे?

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