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भारत का ट्रंप को करारा जवाब: रूस से तेल खरीद पर अमेरिका और EU की आलोचना को बताया 'पाखंड'


नई दिल्ली, 5 अगस्त (CG ई खबर)। 
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ की आलोचना का भारत ने सोमवार को कड़ा जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने इसे "अनुचित और अविवेकपूर्ण" बताते हुए अमेरिका और यूरोप को उनके "दोहरे मापदंड" के लिए आड़े हाथों लिया।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से तेल खरीद इसलिए शुरू की क्योंकि पारंपरिक आपूर्ति मार्ग यूरोप की ओर मोड़ दिए गए थे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य अपने नागरिकों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना है, और यह एक "राष्ट्रीय आर्थिक आवश्यकता" है।

बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका और यूरोपीय संघ स्वयं भी रूस से ऊर्जा, उर्वरक, खनिज, इस्पात, मशीनरी, और अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात कर रहे हैं। मंत्रालय ने तर्क दिया कि इन देशों का भारत की आलोचना करना "पाखंडी रवैया" दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार:

“जहां भारत रूस से ऊर्जा आयात को राष्ट्रीय जरूरत के तहत देखता है, वहीं अमेरिका और यूरोप आर्थिक लाभ के लिए रूस से व्यापार कर रहे हैं – और वह भी ऐसे समय में जब वे खुद रूस की निंदा करते हैं।”

ट्रंप की धमकी और भारत की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अधिक शुल्क लगाने की धमकी दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:

"भारत रूस से सस्ते दाम पर तेल खरीदता है और फिर उसे ऊंचे दाम पर बेचकर मुनाफा कमाता है। उसे इस बात की परवाह नहीं कि रूस यूक्रेन में क्या कर रहा है।"

इसके जवाब में भारत ने कहा कि वह किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

आंकड़ों में तथ्य:

  • भारत-रूस व्यापार: सीमित और मुख्यतः ऊर्जा केंद्रित।
  • EU-रूस व्यापार (2024):
    • द्विपक्षीय व्यापार: €67.5 अरब
    • सेवा क्षेत्र व्यापार: €17.2 अरब
    • LNG आयात (2024): 16.5 मिलियन टन (रिकॉर्ड स्तर)
  • अमेरिका-रूस व्यापार:
    • यूरेनियम, पैलेडियम, उर्वरक, रसायन जैसे उत्पादों का आयात जारी।

प्रमुख बिंदु संक्षेप में:

सवाल जवाब
भारत रूस से तेल क्यों खरीद रहा है? घरेलू ऊर्जा की कीमतों को किफायती बनाए रखने के लिए।
ट्रंप का आरोप क्या है? भारत सस्ता तेल खरीदकर ऊंचे दाम पर बेच रहा है।
भारत का जवाब क्या है? अमेरिका-EU खुद रूस से व्यापार कर रहे हैं, भारत को निशाना बनाना गलत।
क्या ट्रंप भारत पर शुल्क बढ़ा सकते हैं? धमकी दी है, भारत ने जवाब में कहा – "अपने हितों की रक्षा करेंगे।"
भारत-रूस व्यापार बनाम EU-रूस व्यापार? भारत का व्यापार बहुत कम, EU का 67.5 अरब यूरो से अधिक।

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