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झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से बच्ची की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने मचाया हड़कंप — अधिनियम के तहत हुई बड़ी कार्रवाई


( विजय चौहान - संभाग ब्यूरो चीफ़ )

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, 10 अक्टूबर। जिले में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से 13 वर्षीय बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। घटना के बाद विभाग ने जिलेभर में अवैध क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब के खिलाफ अभियान चलाते हुए कड़ी कार्रवाई की।

क्या है मामला?
बुधवार को विशेसरा गांव की 13 साल की बच्ची बीमार हुई थी। परिजनों ने उसका इलाज स्थानीय झोलाछाप डॉक्टर भगवान दास से कराया, लेकिन इलाज के दौरान बच्ची की तबीयत और बिगड़ गई, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर गलत दवा देने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. रामेश्वर शर्मा के निर्देश पर टीम गठित की गई। इस टीम ने गौरेला, पेण्ड्रा और मरवाही क्षेत्र में छापेमारी करते हुए 10 से अधिक अवैध क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैब की जांच की।
इस दौरान सिद्धिविनायक क्लिनिक और इशिका पैथोलॉजी लैब को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।

अधिनियम के तहत कार्रवाई
CMHO ने बताया कि यह कार्रवाई “क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट (पंजीयन और विनियमन) अधिनियम, 2010” एवं “छत्तीसगढ़ चिकित्सा परिषद अधिनियम, 2001” के तहत की गई है। इन अधिनियमों के अंतर्गत बिना पंजीयन या मान्यता प्राप्त डिग्री के चिकित्सा व्यवसाय करना दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है।

उन्होंने आगे कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद झोलाछाप डॉक्टर भगवान दास के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

CMHO की अपील
डॉ. शर्मा ने जनता से अपील की है कि वे अवैध क्लीनिकों और फर्जी डॉक्टरों की सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें। उन्होंने कहा,

“जनता की सेहत से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी व्यक्ति बिना पंजीयन के चिकित्सा व्यवसाय करते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

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