(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)
कोरबा। जिले के जिलगा-मदनपुर-राजाडीह क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला सर्वेक्षण के विरोध में शुक्रवार को आदिवासी समाज का विशाल महासम्मेलन आयोजित किया गया। इस महासम्मेलन में 15 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लेते हुए “जल-जंगल-जमीन बचाओ” के नारे के साथ शांतिपूर्ण रैली निकाली और प्रशासनिक निर्णयों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्रामसभा की सहमति और पूर्व सूचना के कोयला सर्वेक्षण कराया जा रहा है, जो वनाधिकार अधिनियम 2006 और पेसा कानून 1996 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्रामसभा सर्वोच्च है और उसकी अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की परियोजना अवैधानिक है।
महासम्मेलन में कोलगा, मदनपुर, पसरखेत, गेराव, चचिया, तौलीपाली सहित कुल 15 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। कार्यक्रम में कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत, रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया और कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनोज चौहान ने भी शिरकत कर ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन दिया।
“हमारा अधिकार, हमारी सहमति जरूरी”
सभा को संबोधित करते हुए ग्रामीण प्रतिनिधियों ने कहा कि वे पीढ़ियों से इस जमीन, जंगल और जल स्रोतों पर निर्भर हैं। कोयला परियोजना से न केवल विस्थापन का खतरा है, बल्कि रोजगार, आजीविका और पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि बिना ग्रामसभा की लिखित सहमति के कोई भी निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- ग्रामसभा की विधिवत बैठक कर सहमति लिए जाने तक कोयला सर्वेक्षण तत्काल रोका जाए।
- परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेज और जानकारियां सार्वजनिक की जाएं।
- पर्यावरण एवं सामाजिक प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट ग्रामसभाओं के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
- प्रशासन द्वारा ग्रामीणों से सीधा और पारदर्शी संवाद स्थापित किया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और तेज तथा व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

