(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) दायर करने की प्रक्रिया को सख्त करते हुए सुरक्षा राशि को ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित सुरक्षा राशि जमा किए बिना किसी भी PIL पर सुनवाई नहीं की जाएगी।
इस नए नियम के तहत कोर्ट ने कोरबा जिले के डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) में कथित अनियमितताओं से जुड़ी एक जनहित याचिका में याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर शुल्क में छूट के आवेदन को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सुरक्षा राशि में अचानक तीन गुना वृद्धि किए जाने से उन्हें राहत दी जानी चाहिए, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि जो लोग गंभीर और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं, उन्हें निर्धारित सुरक्षा राशि जमा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सुनवाई के बाद यह पाया जाता है कि याचिका वास्तव में जनहित में दायर की गई है, तो जमा की गई सुरक्षा राशि याचिकाकर्ताओं को वापस की जा सकती है।
DMF घोटाले के गंभीर आरोप
यह जनहित याचिका कोरबा जिले के लक्ष्मी चौहान, अरुण श्रीवास्तव और सपूरन दास द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बीते 10 वर्षों में DMF के तहत लगभग 4,000 करोड़ रुपये के व्यय में नियमों और दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन किया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को रोजगार के अवसर नहीं दिए गए, मनमाने तरीके से भवन निर्माण पर भारी खर्च किया गया और कई पात्र परिवारों को योजनाओं के लाभ से वंचित रखा गया।
अगली सुनवाई 12 जनवरी को
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता आगामी शुक्रवार तक ₹15,000 की सुरक्षा राशि जमा करें। इसके पश्चात 12 जनवरी को इस PIL पर सुनवाई होगी। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि जमा नहीं होने की स्थिति में याचिका स्वतः खारिज मानी जाएगी।

