(CG ई खबर | बिलासपुर संभाग ब्यूरो चीफ : विजय चौहान)
कोरबा। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पुटी पखना में गुरुवार को वन अधिकारों और आजीविका की रक्षा को लेकर एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। इस जनआंदोलन का नेतृत्व गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने किया। महापंचायत का मुख्य उद्देश्य वन अधिकार पट्टों की मांग तथा रूंगटा कोल माइंस के प्रस्तावित विस्तार का विरोध था।
आसपास के दर्जनों गांवों से पहुंचे हजारों ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय के लोगों ने इस महापंचायत में हिस्सा लिया और एकजुट होकर प्रशासन व कंपनी के खिलाफ आवाज बुलंद की।
खदान विस्तार पर सवाल, पर्यावरण को लेकर गहरी चिंता
ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि कोयला खदान का विस्तार क्षेत्र की जल-जंगल-जमीन के लिए घातक साबित होगा। पहले से संचालित दो खदानों के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच चुका है, जलस्रोत प्रदूषित हो रहे हैं और लोगों की जीविका पर संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में नई खदान उनके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
विधायक मरकाम का प्रशासन पर गंभीर आरोप
महापंचायत को संबोधित करते हुए विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि
“प्रभावित ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों पर दबाव डालकर खदान विस्तार के पक्ष में जबरन प्रस्ताव पारित कराए जा रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया कंपनी के हित में भूमि अधिग्रहण का रास्ता साफ करने की साजिश है।”
अविश्वास प्रस्ताव की चेतावनी
विधायक मरकाम ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी ग्राम पंचायत खदान विस्तार के समर्थन में प्रस्ताव पारित करेगी, उसके खिलाफ ग्रामीणों के सहयोग से अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार ग्रामसभा और स्थानीय निवासियों का है।
महापंचायत की प्रमुख मांगें
महापंचायत के दौरान ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रशासन और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी की। प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं—
- वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार पट्टों का तत्काल वितरण।
- रूंगटा कोल माइंस की प्रस्तावित विस्तार योजना को तत्काल रद्द किया जाए।
- ग्राम सभाओं की स्वायत्तता का सम्मान किया जाए और उन पर किसी भी प्रकार का दबाव न डाला जाए।
आंदोलन के बाद बढ़ी हलचल
इस विशाल जनआंदोलन के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजरें प्रशासन की प्रतिक्रिया और कंपनी के अगले कदम पर टिकी हैं। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि वे अपने अधिकारों, जंगल और भविष्य की रक्षा के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार हैं।











