(CG ई खबर |कोरबा जिला संवाददाता : नारायण चंद्राकर)
श्रमिक नेताओं ने लगाए सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप
कोरबा। सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में संचालित राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गेवरा–दीपका कोयला परियोजना में एक बार फिर गंभीर औद्योगिक हादसा सामने आया है। एसईसीएल की मेगा दीपका खुली कोयला खदान में मंगलवार को ब्लास्टिंग के दौरान हुए हादसे में एक कर्मी की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे खदान क्षेत्र में अफरा-तफरी और आक्रोश का माहौल बन गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खदान में नियमित रूप से कोयला उत्खनन का कार्य चल रहा था। इसी दौरान विस्फोटक सामग्री से तेज धमाके की आवाज सुनाई दी, जिसकी चपेट में आकर कर्मी लखन पटेल गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि लखन पटेल, ग्राम रेकी का निवासी था और उसकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई।
जांच के बाद ही होगा वास्तविक कारणों का खुलासा
घटना के कारणों और परिस्थितियों को लेकर फिलहाल किसी भी तरह का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। प्रबंधन का कहना है कि पूरे मामले की विस्तृत एवं अधिकृत जांच के बाद ही वास्तविक तथ्यों का खुलासा हो सकेगा। हालांकि, हादसे के तुरंत बाद खदान क्षेत्र में बड़ी संख्या में कर्मचारी और स्थानीय लोग एकत्रित हो गए।
सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का आरोप
घटना के बाद श्रमिक नेताओं और कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कोयला उत्खनन के दौरान विस्फोटक का उपयोग सुरक्षा मानकों और निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत किया जा रहा था। बिना पर्याप्त सूचना, समुचित घेराबंदी और सुरक्षा इंतजामों के ब्लास्टिंग कराए जाने के कारण यह दुखद हादसा हुआ।
श्रमिक संगठनों का आरोप है कि बारूद के उपयोग में निर्धारित मानकों की अनदेखी लगातार की जा रही है, जिसके चलते पहले भी खदानों में हादसे होते रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर खदानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आक्रोशित कर्मचारियों ने उठाई कार्रवाई की मांग
हादसे के बाद कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। श्रमिक संगठनों ने मृतक कर्मी के परिजनों को समुचित मुआवजा, एक आश्रित को नौकरी तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, खदान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग भी उठी है।
फिलहाल प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पूरे मामले पर सभी की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि हादसा लापरवाही का नतीजा था या तकनीकी चूक का।

