(CG ई खबर | दर्री ब्लॉक रिपोर्टर : सरस्वती मरकाम)
अंबिकापुर (सरगुजा)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर में आज जल, जंगल, जमीन और पहाड़ों की रक्षा को लेकर एक विशाल जनआंदोलन आयोजित किया जा रहा है। अलग–अलग सामाजिक संगठनों, संघर्ष समितियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में यह महाआंदोलन बीटीआई ग्राउंड में होगा, जिसमें प्रदेश भर से सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और प्रभावित ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी रहने की संभावना है।
आंदोलन की रूपरेखा दिसंबर माह में अंबिकापुर में आयोजित बैठक में तय की गई थी। आयोजकों का कहना है कि सरगुजा अंचल में लगातार बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों, कोयला खदानों और खनन परियोजनाओं के कारण क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर गंभीर संकट मंडरा रहा है, जिसके विरोध में यह आंदोलन शुरू किया गया है।
हसदेव और रामगढ़ पहाड़ी चिंता का केंद्र
आंदोलन का प्रमुख मुद्दा हसदेव क्षेत्र में कोयला खदानों के लिए हो रही जंगलों की अंधाधुंध कटाई और ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ी के अस्तित्व पर बढ़ता खतरा है। सामाजिक संगठनों का आरोप है कि खदानों में की जा रही लगातार ब्लास्टिंग से पहाड़ी में दरारें पड़ रही हैं और बड़े-बड़े पत्थर टूटकर नीचे गिर रहे हैं। ब्लास्टिंग के दौरान पूरा इलाका कांप उठता है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भय और आक्रोश व्याप्त है।
प्रदेश भर से पहुंचेंगे प्रभावित लोग
इस महाआंदोलन में सीमेंट फैक्ट्री, कोयला खदान, बॉक्साइट और चूना पत्थर खदानों से प्रभावित जिलों के लोग भी शामिल होंगे। हसदेव बचाओ संघर्ष समिति, छत्तीसगढ़ बचाओ संघर्ष समिति सहित कई सामाजिक संगठन आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।
पहले भी हो चुका है विरोध
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों रायगढ़ के तमनार और सरगुजा के अमेरा कोल माइंस क्षेत्र में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ता प्रदूषण, जंगलों की कटाई और पर्यावरणीय नुकसान अब असहनीय होता जा रहा है, इसलिए मजबूर होकर उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
आयोजकों के अनुसार यह आंदोलन सरकार और प्रशासन को प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का स्पष्ट संदेश देगा।









