(CG ई खबर : कटघोरा ब्लॉक संवाददाता – पिंकी महंत)
कोरबा। दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की गेवरा कोयला खदान में 3 जनवरी 2026 को हुई हिंसक झड़प का कारण कोयला लिफ्टिंग को लेकर दो निजी ठेका कंपनियों के बीच उपजा विवाद बताया जा रहा है। घटना शनिवार को उस समय हुई, जब KCPL और KK एंटरप्राइजेज के कर्मचारियों के बीच वर्चस्व और कार्य अधिकार को लेकर कहासुनी बढ़ते-बढ़ते मारपीट में बदल गई।
क्या है पूरा मामला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोयला उठाने के कार्य को लेकर दोनों कंपनियों के कर्मचारियों में पहले विवाद हुआ, जो देखते ही देखते लात-घूंसे चलने तक पहुंच गया। झड़प इतनी उग्र हो गई कि मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को बीच-बचाव करना पड़ा, लेकिन वे भी हाथापाई की चपेट में आ गए।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे खदान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर दीपका थाना में शिकायत दर्ज कर ली गई है और पुलिस द्वारा जांच शुरू कर दी गई है।
प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
खदान में कार्यरत कर्मचारियों का आरोप है कि गेवरा खदान में इस तरह की घटनाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए।
कर्मचारियों का कहना है कि पहले खदान परिसर में मजबूत सीसीटीवी निगरानी और कड़े सुरक्षा नियम लागू थे, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था कमजोर पड़ चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि हालात पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
पहले से विवादों में घिरी रही है गेवरा खदान
यह पहली बार नहीं है जब गेवरा खदान विवादों के कारण सुर्खियों में आई हो। इससे पहले भी यहां कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं—
- भू-विस्थापन को लेकर विरोध: अक्टूबर 2025 में पुनर्वास और रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे भू-विस्थापितों पर CISF जवानों द्वारा लाठीचार्ज किया गया था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे।
- कोयला चोरी का मामला: दिसंबर 2025 में खदान से कोयले की अवैध निकासी और संगठित घोटाले का खुलासा हुआ था, जिसमें पुलिस ने ट्रकों को जब्त कर जांच शुरू की थी।
- खदान विस्तार का विरोध: स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से खदान विस्तार, मुआवजा और रोजगार को लेकर आंदोलन करते रहे हैं।
गंभीर सवाल खड़े करती घटना
ताज़ा हिंसक झड़प और बीते महीनों के विवाद यह संकेत देते हैं कि गेवरा खदान परिसर में सुरक्षा व्यवस्था, प्रबंधन नियंत्रण और स्थानीय समुदाय से संवाद को लेकर गंभीर खामियां मौजूद हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति और भी विस्फोटक रूप ले सकती है।

