(CG ई खबर | दर्री ब्लॉक रिपोर्टर: सरस्वती मरकाम)
कोरबा, छत्तीसगढ़। 14/जनवरी/ 2026 : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक रहस्यमयी और हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है। जिले का भटगांव, जो कोरबा मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है, आज भी अपनी अनोखी परंपरा और मान्यताओं के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां के कई पुराने घरों में सामने की ओर दरवाजे ही नहीं होते।
डेढ़ सौ साल पुरानी मान्यता
ग्रामीण बुजुर्गों के अनुसार, यह परंपरा करीब 150 साल पुरानी है। गांव में एक समय ऐसा भय व्याप्त हो गया था कि लोगों को लगता था कि प्रेत आत्माएं घरों में प्रवेश कर उत्पात मचाती हैं। इस डर के कारण ग्रामीणों का सामान्य जीवन प्रभावित होने लगा। लगातार हो रही घटनाओं और भय के माहौल के बीच गांव की सामूहिक बैठक हुई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि अब घरों के मुख्य दरवाजे सामने की बजाय पीछे की ओर बनाए जाएंगे।
जंगली जानवरों से जुड़ा दूसरा कारण
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उस समय इलाके में जंगली जानवरों का आतंक था। शाम ढलते ही जंगल से जानवर गांव की ओर आ जाते थे और कई बार ग्रामीणों पर हमले की घटनाएं भी सामने आई थीं। पीछे की ओर दरवाजा होने से न सिर्फ अदृश्य शक्तियों का भय कम हुआ, बल्कि जंगली जानवरों से भी सुरक्षा मिली। धीरे-धीरे यही व्यवस्था गांव की परंपरा बन गई।
आज भी दिखती है दहशत की छाया
हालांकि समय के साथ नई पीढ़ी आधुनिक शैली में मकान बनवा रही है, लेकिन पुराने घरों की बनावट आज भी जस की तस है। भटगांव से आगे स्थित परसाखोला पिकनिक स्पॉट की ओर जाने वाले पर्यटक जब इस गांव से गुजरते हैं, तो घरों के सामने दरवाजे न देखकर हैरान रह जाते हैं। आमतौर पर जहां हर घर का मुख्य द्वार सामने होता है, वहीं भटगांव के कई मकानों में यह नज़ारा बिल्कुल अलग दिखाई देता है।
भटगांव आज भी अपनी इस अनोखी परंपरा और रहस्यमयी मान्यता के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जो आधुनिकता के दौर में भी लोकविश्वास की गहरी जड़ों को दर्शाता है।









