ads 90x728

आरक्षक भर्ती विवाद: CCTV फुटेज डिलीट, हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब


(CG ई खबर |कोरबा जिला संवाददाता : नारायण चंद्राकर)

छत्तीसगढ़ / बिलासपुर — छत्तीसगढ़ में चल रही 6,000 आरक्षक (कांस्टेबल) पदों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी अभ्यर्थी को नए नियुक्ति पत्र जारी न किए जाएं। यह आदेश शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Test) में कथित बड़े पैमाने पर हुई धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद दिया गया है।

फिजिकल टेस्ट में गड़बड़ी और डिलीट हुए CCTV फुटेज

वर्ष 2023 में विज्ञापित इस भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक दक्षता परीक्षा का डेटा रिकॉर्ड करने का कार्य शासन द्वारा आउटसोर्सिंग एजेंसी टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी ने निष्पक्षता से कार्य नहीं किया। आरोप है कि पैसों के लेन-देन के आधार पर कई अयोग्य अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य तब सामने आया जब बिलासपुर पुलिस अधीक्षक (SP) की जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया। रिपोर्ट में प्रशासन ने स्वयं स्वीकार किया है कि डेटा एंट्री में गंभीर त्रुटियां पाई गई हैं। इतना ही नहीं, साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से एजेंसी द्वारा फिजिकल टेस्ट के CCTV फुटेज डिलीट किए जाने की बात भी सामने आई है, जो पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

इन जिलों के युवाओं ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा

भर्ती प्रक्रिया में कथित धांधली से आहत होकर सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली जिलों के युवाओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं में मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास और अजय कुमार सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा दी, लेकिन भ्रष्ट सिस्टम और मिलीभगत के कारण उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।

शासन से मांगा गया जवाब

हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में राज्य शासन से स्पष्ट जवाब तलब करते हुए पूछा है कि जब जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, तो दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि आरोप सही पाए गए, तो भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने तक के विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और शासन के जवाब पर टिकी हुई हैं, जिससे यह तय होगा कि हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी यह भर्ती प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad

Ads

ads