(CG ई खबर | जिला संवाददाता : नारायण चंद्राकर)
कोरबा। छत्तीसगढ़ में बढ़ी हुई बिजली दरों और बार-बार हो रही कटौती को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच अब एक नया और बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में मंत्रियों, सांसदों, डिप्टी सीएम, IAS अधिकारियों और कई सरकारी विभागों पर कुल मिलाकर करीब 6500 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया है।
कांग्रेस का कहना है कि ठंड के मौसम में जहां आम उपभोक्ताओं के कुछ हज़ार रुपये बकाया होने पर तुरंत बिजली कनेक्शन काट दिए जाते हैं, वहीं प्रभावशाली पदों पर बैठे लोग और सरकारी संस्थान लाखों-करोड़ों रुपये का बकाया होने के बावजूद कार्रवाई से बचे हुए हैं।
कांग्रेस का दोहरा मापदंड का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि सरकार की बिजली नीति आम जनता के साथ अन्यायपूर्ण है।
“गरीब और मध्यम वर्ग का बिजली बिल थोड़ी सी देरी होने पर काट दिया जाता है, जबकि माननीयों और अफसरों के करोड़ों रुपये बकाया होने के बावजूद कोई नोटिस तक जारी नहीं किया जाता,”
— कांग्रेस प्रवक्ता
पार्टी ने सवाल उठाया कि जब बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) आम उपभोक्ताओं पर सख्ती दिखा सकती है, तो फिर मंत्रियों, विधायकों, IAS अधिकारियों और सरकारी भवनों पर बकाया वसूली क्यों नहीं की जा रही?
नाम सामने आने का दावा
कांग्रेस का दावा है कि बकायेदारों की सूची में
- डिप्टी सीएम
- मंत्री
- IAS अधिकारी
- सरकारी विभाग व निगम
- सरकारी आवास और कार्यालय
शामिल हैं। पार्टी ने मांग की है कि इन सभी नामों की सार्वजनिक सूची जारी की जाए और आम जनता की तरह ही इनके खिलाफ भी कार्रवाई हो।
सरकार से जवाब की मांग
कांग्रेस ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि—
- क्या बकाया बिजली बिल की वसूली सभी के लिए समान नियमों के तहत होगी?
- क्या प्रभावशाली लोगों के कनेक्शन भी काटे जाएंगे?
- आम जनता पर बढ़े हुए बिजली बिलों का बोझ कब कम किया जाएगा?
राजनीतिक घमासान तेज
इस मुद्दे को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने बकाया राशि और जिम्मेदार लोगों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं की, तो वह इसे लेकर सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस गंभीर आरोप पर क्या सफाई देती है और क्या वास्तव में करोड़ों के बिजली बिल बकाया मामले में “समान कार्रवाई” का सिद्धांत लागू हो पाता है या नहीं।











