उत्तर प्रदेश/मऊ जिला : के मऊ जिले से सामने आए यौन शोषण के सनसनीखेज मामले ने अब प्रदेश की राजनीति को भी झकझोर कर रख दिया है। रेप पीड़िता पर कथित दबाव बनाए जाने और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। पीड़िता की शिकायत पर भाजपा से जुड़े बताए जा रहे दो नेताओं सहित तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला
यह प्रकरण मऊ जिले के थाना सराय लखंसी क्षेत्र का है। डूडा विभाग में तैनात रहे इंजीनियर अंकित सिंह पर उनकी पूर्व महिला सहकर्मी ने यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया था। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने 23 जनवरी को मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद माना जा रहा था कि मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा।
मुकदमा वापस लेने का दबाव, वीडियो हुआ वायरल
इसी बीच मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोप लगा कि आरोपी के पक्ष में कुछ भाजपा नेता पीड़िता के घर पहुंचे और उस पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने लगे। पीड़िता ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक सियासी हलचल तेज हो गई।
भाजपा नेता सहित तीन पर केस दर्ज
मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने पीड़िता से प्रार्थना पत्र लेकर दबाव बनाने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। सोमवार शाम करीब 5:30 बजे दर्ज एफआईआर में भाजपा जिला उपाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह उर्फ पन्नू, कन्हैया तिवारी और हिमांशु राय के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है।
पीड़िता का बयान
पीड़िता का कहना है, “भाजपा नेताओं ने समझौते के लिए पैसों का ऑफर दिया। कहा गया कि आरोपी शादी कर ले या जेल जाए, लेकिन मैं किसी भी हाल में समझौता नहीं करूंगी।”
सपा का भाजपा पर तीखा हमला
वीडियो वायरल होते ही समाजवादी पार्टी ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला। सपा ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल से मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा कि भाजपा नेताओं को अब “रेप सेटलमेंट” की ड्यूटी दे दी गई है। सपा के इस बयान के बाद मऊ जिले की राजनीति और अधिक गरमा गई है।
पुलिस का पक्ष
मामले में अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ दबाव बनाने से संबंधित मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे विधिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला कानून, सत्ता और नैतिकता के टकराव का प्रतीक बन गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पीड़िता को बिना किसी राजनीतिक दबाव के न्याय मिल पाएगा, या फिर रसूख इस केस की दिशा तय करेगा।











