(CG ई खबर | दर्री ब्लॉक रिपोर्टर : सरस्वती मरकाम)
दिनांक : 12 जनवरी, 2026 |कोरबा। छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक जिले कोरबा में लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण अब आम जनजीवन और स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों और कोयला आधारित ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
कोरबा को देशभर में “ऊर्जा नगरी” के रूप में जाना जाता है। जिले में एनटीपीसी कोरबा सुपर थर्मल पावर स्टेशन, हसदेव थर्मल पावर स्टेशन, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थर्मल पावर स्टेशन, अडानी कोरबा पावर लिमिटेड, बालको एल्यूमिनियम प्लांट सहित कई बड़े कोयला आधारित उद्योग संचालित हैं। इसके साथ ही बांगो हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर स्टेशन भी जिले में स्थित है, जो ऊर्जा उत्पादन में योगदान देता है, लेकिन कोयला आधारित उद्योगों का पर्यावरण पर दुष्प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
PM-2.5 और PM-10 बना सबसे बड़ा खतरा
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार कोरबा की हवा में PM-2.5 और PM-10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच रही है। ये कण सीधे फेफड़ों में जाकर दमा, सांस संबंधी रोग, हृदय रोग, त्वचा रोग और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
स्वास्थ्य मानकों के अनुसार यदि PM-2.5 का स्तर 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक हो जाए तो बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए बाहर निकलना जोखिम भरा माना जाता है, जबकि कोरबा में कई बार यह स्तर इससे कहीं अधिक दर्ज किया गया है।
प्रशासन और उद्योगों पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण के मुद्दे पर प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी साफ नजर आती है। जब भी प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाई जाती है, उसे व्यक्तिगत या राजनीतिक मुद्दा बताकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
नागरिकों का कहना है कि उद्योगों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का सही ढंग से उपयोग नहीं किया जाता और नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद कठोर कार्रवाई नहीं होती।
स्वास्थ्य पर बढ़ता असर
स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार प्रदूषण के कारण बच्चों में सांस की तकलीफ, बुजुर्गों में दमा और हृदय रोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सुबह-शाम घर के अंदर रहने, मास्क का उपयोग करने और बच्चों को खुले में खेलने से बचाने की सलाह दी है।
समाधान की मांग
पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—
- सभी औद्योगिक इकाइयों की नियमित और पारदर्शी पर्यावरण जांच हो।
- प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
- हरित क्षेत्र (ग्रीन बेल्ट) विकसित किए जाएं।
- आम जनता को प्रदूषण स्तर की वास्तविक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कोरबा का वायु प्रदूषण भविष्य में और भी भयावह रूप ले सकता है, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।









