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RES दफ्तर पोड़ी-उपरोड़ा में गजब कहानी, जिला से पूर्व SDO को संरक्षण किसलिए…?


(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)

कोरबा जिले के ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) संभाग के अंतर्गत पोड़ी-उपरोड़ा कार्यालय में इन दिनों अजीबोगरीब हालात बने हुए हैं। जिला कार्यालय के संरक्षण में यहां खुलेआम भर्राशाही चलने के आरोप लग रहे हैं, जिसका सीधा असर विकास कार्यों और उनके भुगतान पर पड़ रहा है। आपसी खींचतान के चलते कई कार्यों का भुगतान अटका हुआ है।

स्थिति यह है कि शासन द्वारा विधिवत पदस्थ किए गए अनुविभागीय अधिकारी (SDO) जी.एस. ठाकुर को कार्यालय में रहते हुए भी उनके कार्यों से पृथक कर दिया गया है, जबकि जिन राजेश गुप्ता का शासन आदेश से दूसरे जिले में तबादला हो चुका है, वे कार्यमुक्त होने के बाद भी आदेश की अवहेलना करते हुए पोड़ी RES कार्यालय का संचालन कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला विभागीय जिला अधिकारियों की जानकारी में है, इसके बावजूद मौखिक आदेशों के सहारे न केवल शासन के निर्देशों की अनदेखी की जा रही है, बल्कि उच्च न्यायालय के आदेशों की भी अवमानना होती दिख रही है। शासन द्वारा पदस्थ अधिकारी को काम से दूर रखना स्पष्ट रूप से अनुशासनहीनता और कदाचरण के दायरे में आता है।


13 जनवरी की समय-सीमा भी बेअसर

छत्तीसगढ़ शासन ने 7 जनवरी 2026 को स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा था कि जिन अधिकारी-कर्मचारियों का तबादला दूसरे जिले में किया गया है, वे 13 जनवरी 2026 तक नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करें। जनवरी 2026 से उनका वेतन भी नई पदस्थापना स्थल से जारी किया जाना था।

हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया था कि अनुसूचित जिलों से गैर-अनुसूचित जिलों में स्थानांतरण की स्थिति में एवजीदार के कार्यभार ग्रहण करने तक कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। लेकिन इस मामले में एवजीदार मौजूद होने के बावजूद पूर्व SDO राजेश गुप्ता न तो कोरबा जिला छोड़ रहे हैं और न ही नई पदस्थापना पर जा रहे हैं। इससे शासन के साथ-साथ उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना सामने आ रही है।


👉🏻 स्थगन के बावजूद नियमों की अनदेखी

मामले में यह तथ्य भी अहम है कि छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय महानदी भवन के आदेश दिनांक 07.01.2026 तथा परिपत्र दिनांक 25.11.2024 के परिपालन में, 28.10.2024 को कार्यपालन अभियंता RES कोरबा द्वारा जारी आदेश के तहत जी.एस. ठाकुर ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उप संभाग पोड़ी-उपरोड़ा में SDO के रूप में विधिवत कार्यभार ग्रहण किया था और अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे।

वहीं, तत्कालीन SDO राजेश गुप्ता को 28.10.2024 को ही शासन आदेश के पालन में कार्यमुक्त कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने बिना शासन में अपील किए, अपील की समय-सीमा समाप्त होने के पश्चात 19.11.2024 को उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त किया।
नियमों के अनुसार, स्थगन का अर्थ यथास्थिति होता है—यानी जिस स्थिति में कर्मचारी था, उसी स्थिति में रहेगा। चूंकि स्थगन की तिथि तक राजेश गुप्ता कार्यमुक्त हो चुके थे और श्री ठाकुर ज्वाइन कर चुके थे, ऐसे में कार्यमुक्त अधिकारी से नियमविरुद्ध कार्य लिया जाना कई सवाल खड़े करता है।

स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि श्री ठाकुर के हस्ताक्षर वाली फाइलें जिला कार्यालय से लौटा दी जा रही हैं और उन्हीं फाइलों को राजेश गुप्ता के हस्ताक्षर से दोबारा मंगाया जा रहा है। यह न केवल प्रशासनिक अराजकता को दर्शाता है, बल्कि शासन व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।


अब सवाल यह है कि
क्या जिला स्तर पर पूर्व SDO को किसी विशेष कारण से संरक्षण दिया जा रहा है?
और क्या शासन व न्यायालय के आदेशों की खुलेआम अनदेखी पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?

— CG ई खबर

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