(CG ई खबर |कोरबा जिला संवाददाता : नारायण चंद्राकर)
नई दिल्ली। एलन मस्क की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI का बहुचर्चित चैटबॉट ‘Grok’ एक बार फिर विवादों में घिर गया है। फर्जी और अश्लील डीपफेक तस्वीरें तैयार करने के आरोपों के बाद इंडोनेशिया और मलेशिया की सरकारों ने इस एआई टूल पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। दोनों देशों का कहना है कि Grok का दुरुपयोग महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने भी हाल के दिनों में एक्स (X) के एआई टूल Grok के जरिए फैल रहे आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर चिंता जाहिर की थी।
डिजिटल दुनिया के लिए खतरा बना एआई
मलेशिया और इंडोनेशिया द्वारा उठाया गया यह कदम इस ओर इशारा करता है कि अब एआई तकनीक बिना कड़े नियमों के आगे नहीं बढ़ सकेगी। मलेशियाई संचार और मल्टीमीडिया आयोग (MCMC) की जांच में सामने आया कि Grok की तकनीक का अश्लील और पोर्नोग्राफिक कंटेंट बनाने में दुरुपयोग किया जा रहा था।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि यह सामग्री लोगों की सहमति के बिना तैयार की जा रही थी, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, निजता और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा था। नियामकों ने इसे समाज के लिए गंभीर जोखिम बताया है।
चेतावनी के बावजूद नहीं हुए ठोस सुधार
नियामकों ने xAI और एक्स (X) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। MCMC के अनुसार, 3 और 8 जनवरी को कंपनी को नोटिस भेजकर तत्काल तकनीकी सुरक्षा उपाय लागू करने को कहा गया था।
आरोप है कि कंपनी ने डीपफेक जनरेशन जैसी समस्या की जड़ पर रोक लगाने के बजाय केवल यूजर रिपोर्टिंग सिस्टम पर भरोसा किया। सुरक्षा को लेकर इस उदासीन रवैये के चलते ही नियामकों ने Grok को ब्लॉक करने का कड़ा फैसला लिया।
नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
सरकारों ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी केवल तकनीक उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके दुरुपयोग को रोकना भी उतना ही जरूरी है। नागरिकों—खासतौर पर महिलाओं और बच्चों—की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
नियामकों ने संकेत दिए हैं कि यदि कंपनी मजबूत सुरक्षा तंत्र लागू करती है और नियमों का पालन सुनिश्चित करती है, तभी भविष्य में प्रतिबंध पर पुनर्विचार संभव होगा।
भारत में भी बढ़ी सतर्कता
भारत में भी एआई के दुरुपयोग को लेकर निगरानी बढ़ाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक जैसी तकनीकों पर कड़े दिशा-निर्देश और जवाबदेही तय करना समय की मांग है, ताकि डिजिटल दुनिया सुरक्षित रह सके।
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