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धोखाधड़ी का ‘मास्टर ब्लास्टर’: चंदराम यादव के 67% अंकों का सच आया सामने


सरकारी सिस्टम को 18 साल तक रखा अंधेरे में…

(CG ई खबर – कोरबा जिला संवाददाता: नारायण चंद्राकर)

बलौदाबाजार/रायपुर: शिक्षा व्यवस्था की नींव को भीतर से खोखला करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। शिक्षा के मंदिर में बैठकर ‘असत्य’ की बुनियाद पर करियर खड़ा करने वाले शिक्षक चंदराम यादव (शिक्षक एल.बी., शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दलदली) का फर्जीवाड़ा अब सरकारी रिकॉर्ड में उजागर हो चुका है। संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय, रायपुर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर-चांपा को जारी हालिया नोटिस ने इस बहुचर्चित मामले की परतें खोल दी हैं।


अंकों की ‘हेराफेरी’ का गणित: 1210 बनाम 880

विभागीय जांच एवं उपलब्ध दस्तावेज (क्रमांक/सतर्कता/एफ-339/2025) के अनुसार, नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेजों में भारी अनियमितता पाई गई—

  • चयन सूची का दावा: भर्ती प्रक्रिया में चंदराम यादव के बी.एस.सी. अंक 1800 में से 1210 (67.22%) दर्शाए गए।
  • हकीकत का खुलासा: वास्तविक विश्वविद्यालयीय रिकॉर्ड के अनुसार उनके अंक 1800 में से मात्र 880 (48.88%) निकले।
  • दोहरी जालसाजी: जांच में यह भी सामने आया कि शिक्षाकर्मी वर्ग–02 की भर्ती और कार्यभार ग्रहण के समय अलग-अलग अंकसूचियों की प्रतियां जमा की गईं, ताकि स्वयं को मेधावी सिद्ध किया जा सके।

शपथ ‘निष्ठा’ की, अमल ‘जालसाजी’ का

दस्तावेजों में शामिल शपथ पत्र (Oath) में चंदराम यादव ने सत्यनिष्ठा और ईमानदारी से कर्तव्य निर्वहन की प्रतिज्ञा की थी। इसके बावजूद 01-07-2018 को संविलियन के समय भी वास्तविक शैक्षणिक तथ्यों को छुपाए रखा गया, जिससे स्पष्ट होता है कि यह केवल त्रुटि नहीं, बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी थी।


प्रशासनिक सख्ती: अब ‘सत्यापित कार्रवाई’ की बारी

संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय, रायपुर ने मामले को गंभीर कदाचार मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर-चांपा से विस्तृत प्रतिवेदन और दस्तावेजी पुष्टि तलब की है। सूत्रों के अनुसार—

  • दोष सिद्ध होने पर सेवा से बर्खास्तगी,
  • वेतन एवं लाभ की वसूली,
  • तथा आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की कार्रवाई भी संभव है।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

यह मामला न केवल एक व्यक्ति की जालसाजी को उजागर करता है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया, सत्यापन तंत्र और दीर्घकालिक निगरानी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। 18 वर्षों तक सिस्टम को अंधेरे में रखकर लाभ उठाया जाना प्रशासनिक खामियों की ओर इशारा करता है।

CG ई खबर इस मामले पर आगे की हर कार्रवाई और प्रशासनिक निर्णय पर नजर बनाए रखेगा।

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