(CG ई खबर |दर्री ब्लॉक रिपोर्टर : सरस्वती मरकाम)
छत्तीसगढ़ | कोरबा :- जिला मुख्यालय से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगर निगम कोरबा के वार्ड क्रमांक 34 दादरखुर्द में शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे का खेल खुलेआम चल रहा है। क्षेत्र में बेशकीमती सरकारी भूमि पर कब्जा करने की होड़ मची हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दादरखुर्द से ढेलवाडीह जाने वाले मार्ग पर स्थित श्मशान घाट से लगी लगभग पांच एकड़ शासकीय जमीन पर रातों-रात मकान खड़े कर दिए गए हैं। दिन में जेसीबी मशीनों से जमीन समतल की जा रही है और रात होते ही अवैध निर्माण कर कब्जा पक्का किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन शासकीय होने के साथ-साथ गांव की निस्तार भूमि है, जिसका उपयोग सामुदायिक आवश्यकताओं के लिए किया जाना था।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे अवैध कब्जे के पीछे एक स्थानीय भाजपा नेता का हाथ है। क्षेत्र में जमीन के दाम तेजी से बढ़ने के कारण सरकारी जमीन की अवैध खरीदी-बिक्री का धंधा जोरों पर है। इसी के चलते भू-माफियाओं के बीच शासकीय जमीन पर कब्जा करने की होड़ लगी हुई है। बिना किसी अनुमति के सरकारी भूमि पर राखड़ पाटने का काम भी खुलेआम किया जा रहा है।
हालांकि गांववाले दबी जुबान में इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन दबंगों के डर से खुलकर सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्थानीय पार्षद को है, बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या भाजपा पार्षद द्वारा भू-माफियाओं को खुला संरक्षण दिया जा रहा है?
वहीं दूसरी ओर राजस्व विभाग के हल्का पटवारी और नगर निगम कोरबा की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि पटवारी अपने क्षेत्र में हो रहे शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे को रोकने का कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं और न ही इसकी सूचना अपने उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है। नगर निगम प्रशासन भी अपने क्षेत्र में हो रहे इस गंभीर अतिक्रमण को लेकर उदासीन नजर आ रहा है।
जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं होने के कारण भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और अवैध कब्जों का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में दादरखुर्द सहित आसपास के क्षेत्रों में शासकीय जमीन का नामोनिशान मिट सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर सरकारी जमीन पर कब्जे का यह खेल यूं ही चलता रहेगा? जनता की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

