कोरबा, 17 मार्च : कोरबा जिले के बालको क्षेत्र में आयोजित का ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन अपेक्षित जनसमर्थन जुटाने में नाकाम रहा। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में कुर्सियां लगाई गई थीं, लेकिन अधिकांश खाली नजर आईं, जिससे आंदोलन का असर कमजोर दिखाई दिया।
जानकारी के मुताबिक, रोजगार सहित विभिन्न मांगों को लेकर यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में पार्टी नेता ने सभा को संबोधित किया, लेकिन भीड़ अपेक्षा से काफी कम रही। इससे आंदोलन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आंदोलन में उठाए गए मुद्दे आम जनता को उतने प्रासंगिक नहीं लगे, जितनी उम्मीद की जा रही थी। यही वजह रही कि नागरिकों की भागीदारी सीमित रही और कार्यक्रम फीका पड़ गया।
बताया जा रहा है कि बालको क्षेत्र में पार्टी का संगठनात्मक ढांचा मजबूत नहीं होने के कारण कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बड़ी संख्या में नहीं जुटाया जा सका। वहीं मजदूर वर्ग ने भी आंदोलन में विशेष रुचि नहीं दिखाई। उनका कहना था कि उठाए गए मुद्दे उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं हैं।
कुछ स्थानीय नागरिकों ने यह भी माना कि आंदोलन स्थानीय समस्याओं के समाधान से अधिक राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास नजर आया, जिससे लोगों का भरोसा कम हुआ।
आयोजन को लेकर यह चर्चा भी रही कि पार्टी पदाधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी और जमीनी हकीकत में अंतर होने के कारण तैयारी और जनसमर्थन दोनों कमजोर रहे।
सुरक्षा के मद्देनजर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कई बार ऐसा भी देखने को मिला कि आंदोलनकारियों की तुलना में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की संख्या अधिक नजर आई, जो पूरे कार्यक्रम की स्थिति को खुद बयां कर रही थी।

