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SECL गेवरा परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, 27 मार्च से संपूर्ण कार्य ठप करने का ऐलान


(CG ई खबर | प्रमुख संपादक : ओम प्रकाश पटेल)

नराईबोध / कोरबा (छत्तीसगढ़): एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की गेवरा परियोजना से प्रभावित ग्राम नरईबोध सहित आसपास के कई गांवों के विस्थापित ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। ग्रामीणों ने प्रबंधन पर वादाखिलाफी और लगातार झूठे आश्वासन देने का आरोप लगाते हुए 27 मार्च 2026 से पूरी परियोजना का काम ठप करने का ऐलान कर दिया है।


क्या है पूरा मामला?

ग्रामीणों के अनुसार, SECL प्रबंधन ने लिखित रूप से आश्वासन दिया था कि:

  • 18 मार्च 2026 को 5 ड्राइवर और 5 सामान्य मजदूरों को जॉइनिंग दी जाएगी
  • 5 अन्य प्रभावित व्यक्तियों को एक सप्ताह के भीतर रोजगार दिया जाएगा

लेकिन 25 मार्च तक किसी भी व्यक्ति को जॉइनिंग नहीं मिली, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।



बढ़ता आक्रोश और आंदोलन की चेतावनी

लगातार मिल रहे झूठे आश्वासनों से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है:

  • कार्य बंदी: 27 मार्च से SECL गेवरा परियोजना और पीएनसी कंपनी के सभी कार्य बंद किए जाएंगे
  • जिम्मेदारी तय: कार्य बाधित होने से होने वाले नुकसान की पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन की होगी
  • प्रशासन को सूचना: कलेक्टर कोरबा, पुलिस अधीक्षक, SDM कटघोरा और स्थानीय थाना को लिखित सूचना दे दी गई है


प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि:

  • सभी 15 प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल जॉइनिंग दी जाए
  • स्थायी रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास की समस्याओं का समाधान किया जाए
  • किए गए सभी वादों को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए

प्रबंधन पर गंभीर आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि SECL गेवरा क्षेत्र और पीएनसी कंपनी हमेशा से प्रभावितों को झूठी उम्मीद देकर केवल अपना काम निकालती हैं, लेकिन बाद में उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर देती हैं।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि:

“हम वर्षों से अपनी जमीन और आजीविका खोकर न्याय का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन ने हमें केवल आश्वासन देकर ठगा है। अब आंदोलन ही आखिरी रास्ता बचा है।”


कानूनी पहलू भी उठाया

ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार:

  • यदि किसी क्षेत्र की जमीन, मकान या आसपास का इलाका खनन से प्रभावित होता है
  • तो उस क्षेत्र के लोगों को मूलभूत सुविधाएं (पानी, बिजली, सड़क) और
  • रोजगार उपलब्ध कराना कंपनी की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है

लेकिन यहां इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।


निष्कर्ष

गेवरा परियोजना में बढ़ता यह विवाद अब बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो 27 मार्च से कोयला उत्पादन और संबंधित कार्य पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय और औद्योगिक स्तर पर बड़ा असर पड़ना तय है।


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