रिपोर्टर : नारायण चंद्राकर (CG ई खबर | 28 मार्च 2026)
देश में एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नई नीति के तहत अब कमर्शियल गैस सिलेंडर का वितरण तय कोटा और खपत के आधार पर किया जाएगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता देना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।
📊 खपत के आधार पर मिलेगा सिलेंडर
नई व्यवस्था के अनुसार अब होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और अन्य व्यवसायों को गैस सिलेंडर पिछले तीन महीनों की औसत खपत के आधार पर ही दिए जाएंगे। इससे जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने और अचानक मांग बढ़ाने जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण लगेगा।
इसके साथ ही, जिन उपभोक्ताओं ने पिछले तीन महीनों में गैस बुकिंग नहीं कराई है, वे इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
📌 कोटा सिस्टम में किसे कितना हिस्सा?
सरकार ने अलग-अलग सेक्टर के लिए गैस वितरण का प्रतिशत तय कर दिया है:
- 🏥 शैक्षणिक व चिकित्सा संस्थान – करीब 30% (जरूरत अनुसार प्राथमिक आपूर्ति)
- 🍽️ होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग – 9-9%
- 🍜 ढाबा व स्ट्रीट फूड विक्रेता – 7%
- 🚔 सुरक्षा व सामाजिक सेवाएं (पुलिस, जेल, CAPF, दीनदयाल रसोई योजना) – 35%
- 🏭 फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, पोल्ट्री, सीड प्रोसेसिंग – 5%
- ⚙️ अन्य उद्योग – 5%
🎯 क्या होगा फायदा?
इस नई व्यवस्था से जरूरी सेवाओं को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी, वहीं अनियमित वितरण और कालाबाजारी पर भी सख्ती से रोक लगेगी। सरकार का मानना है कि इससे एलपीजी सप्लाई सिस्टम ज्यादा संतुलित और पारदर्शी बनेगा।

