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ढेलवाडीह (दादरखुर्द) में 13 एकड़ सरकारी जमीन हड़पने का बड़ा खेल, भूमाफियाओं के आगे राजस्व विभाग बेबस!


📍 कोरबा, छत्तीसगढ़

✍️ जिला संवाददाता: नारायण चंद्राकर

कोरबा तहसील अंतर्गत राजस्व ग्राम ढेलवाडीह (दादरखुर्द) में करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन घोटाले का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, यहां के भू-माफियाओं ने करीब 13 एकड़ सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज करवा लिया, जिससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा खेल वर्ष 1970 से 1985 के बीच का बताया जा रहा है। उस समय ढेलवाडीह ग्राम, दादरखुर्द पटवारी हल्का के अंतर्गत आता था और इसी का फायदा उठाते हुए भूमाफियाओं ने तत्कालीन पटवारी से सांठगांठ कर कचांदी नाला से लगे रापाखर्रा सरहद और चनवारी टिकरा क्षेत्र की सरकारी जमीन को गलत तरीके से अपने नाम पर दर्ज करवा लिया।

बताया जा रहा है कि इस घोटाले में शामिल तीन लोगों में से दो की मृत्यु हो चुकी है, जबकि एक अभी जीवित है। हैरानी की बात यह है कि बाद में जब शासन द्वारा बी-वन खसरा (अधिकार अभिलेख) तैयार किया गया, तब किसी भी राजस्व अधिकारी ने इन नामों को वैध रूप से दर्ज नहीं किया और न ही ये लोग कभी जमीन पर काबिज रहे। यानी यह पूरा मामला केवल कागजों तक ही सीमित रहा।

स्थानीय लोगों के अनुसार, ढेलवाडीह के किसी भी ग्रामीण को आज तक इस जमीन के नामांतरण की जानकारी नहीं थी, जिससे यह साफ होता है कि यह पूरी प्रक्रिया गोपनीय तरीके से की गई।

चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि मृत व्यक्तियों के वारिसों और एक महिला भू-माफिया ने वर्तमान राजस्व अधिकारियों को गुमराह कर पुनः उसी सरकारी जमीन को अपने नाम पर दर्ज करवा लिया। इसके बाद आपसी सांठगांठ कर इस जमीन की खरीद-फरोख्त की भी तैयारी की गई।

🔴 बड़ा सवाल:
क्या इतने बड़े जमीन घोटाले में केवल भूमाफिया ही जिम्मेदार हैं, या फिर राजस्व विभाग की लापरवाही (या मिलीभगत) भी इसमें शामिल है?

📌 मांग:
स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी संपत्ति की लूट पर लगाम लगाई जा सके।

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